भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 के दौरान असम मेंं पूरे वर्ष की 4.6 फीसदी फसल उत्पादित हुई थी।
भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 के दौरान असम मेंं पूरे वर्ष की 4.6 फीसदी फसल उत्पादित हुई थी। उस पूरे साल ही चाय बागानों को बंद करने से मार्च माह के दौरान पैदा होने वाली लगभग 30 मिलियन किग्रा चाय फसल का नुकसान झेलना पड़ा। भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 के दौरान असम मेंं पूरे वर्ष की 4.6 फीसदी फसल उत्पादित हुई थी। उस पूरे साल (जनवरी से दिसंबर) के दौरान असम में 715.79 मिलियन किग्रा चाय फसल का उत्पादन हुआ था।
नेटा के सलाहकार के मुताबिक लंबे लॉकडाउन के कारण राज्य में तकरीबन 35 फीसदी चाय पौधों की, चाय पत्तियों के अधिक बड़ी हो जाने के फलस्वरूप, छंटाई कर देनी पड़ेगी। स्किपिंग ऑपरेशन में अतिरिक्त खर्च भी वहन करना पड़ेगा। इसके बाद चाय पत्तियों के फिर तोड़ने लायक होने में दो से तीन सप्ताह तक का समय लग जाएगा। फलतः अप्रैल व मई की फसल का नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
अप्रैल 2019 के दौरान असम में वार्षिक फसल का 6.3 फीसदी उत्पादन हुआ था। लेकिन अब प्लकिंग ऑपरेशन 15 अप्रैल से शुरू होने और स्किफिंग के कारण होने वाली फसल क्षति से अप्रैल के दौरान कुल फसल उत्पादन में तकरीबन 30 मिलियन किग्रा की कमी आएगी। इसलिए पूरी तरह रिकवरी होने तक मई माह के दौरान भी फसल उत्पादन में तकरीबन बीते साल की तुलना में अनुमानतः 20 मिलियन किग्रा फसल का नुकसान झेलना पड़ेगा। इस प्रकार कुल मिलाकर लॉकडाउन के कारण असम चाय उद्योग को लगभग 80 मिलियन किग्रा चाय फसल का नुकसान उठाना पड़ेगा।
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