वर्चुअल शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक शुरुआत है।
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केरी की चीन यात्रा और सोमवार को दिए ब्लिंकेन के भाषण के बाद चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक टिप्पणी में जलवायु मुद्दे पर अमेरिकी नजरिए की कड़ी आलोचना की। इसमें अमेरिका को सलाह दी गई कि वह जलवायु के मसले को शीत युद्ध के नजरिए से देखना बंद करे।
टिप्पणी में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर दोनों देशों में सहमति है। इसके बावजूद अगर शीत युद्ध का नजरिया अपनाया गया, तो इस मामले में भी गतिरोध पैदा हो जाएगा और उससे दोनों देशों के रिश्ते और बिगड़ेंगे। ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि केरी की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त बयान सकारात्मक दिशा में था। लेकिन उसके बाद ब्लिंकेन ने जो कहा कि उससे ऐसा लगता है कि अमेरिका मिला-जुला संकेत दे रहा है।
पश्चिमी मीडिया में छपी टिप्पणियों में अमेरिका में जलवायु मुद्दे पर जारी मतभेदों का जिक्र किया गया है। वहां डेमोक्रेटिक के प्रोग्रेसिव धड़े की तरफ से हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की सदस्य अलेक्जैंड्रिया ओकासियो कॉर्तेज ने सोमवार को फिर से सदन में महत्त्वाकांक्षी ग्रीन डील का विधेयक पेश किया है। लेकिन अभी तक बाइडन प्रशासन ने इसे नहीं अपनाया है।
रिपब्लिकन पार्टी किसी ऐसे कदम की विरोध रही है। इसलिए ये योजना आगे बढ़ पाएगी, इस पर संदेह है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक अमेरिका ऐसे ठोस कदम उठाता नहीं दिखता, जलवायु चर्चाओं में उसका वैश्विक नेता बन बन पाना मुश्किल बना रहेगा। वर्चुअल शिखर सम्मेलन इस दिशा में एक शुरुआत है, लेकिन बिना ठोस कदमों के ये शुरुआत ज्यादा आगे नहीं जाएगी।
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