नागरिकता संशोधन कानून से माहौल में एक अस्थिरता को भी पैदा किया है।
- फोटो : Amar Ujala Graphics
सरकार की चूक और पूर्वोतर भारत
भारत की प्राथमिकता पहले दस सालों में पूर्वोतर भारत रहा है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से खराब संबंध ने भारत के पास पूर्वी सीमा पर अवसर तलाशने को मजबूर किया। भारत को दक्षिण-पूर्वी एशिया से जोड़ने वाले प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर भी अब नागरिकता कानून के काऱण हिंसा के चपेट में है।यही नहीं पूरा पूर्वोतर भारत इस समय हिंसा के चपेट में है।
दरअसल, सरकार को खुफिया एजेंसियों ने मौके पर असम को लेकर सही रिपोर्ट नहीं दी। सरकार को अंदाजा ही नहीं था कि असम में लोग इस कदर नागरिकता कानून में संशोधन के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।
पूर्वोतर भारत बांग्लादेश, म्यामांर से आगे थाईलैंड, वियतनाम, लाओस का रास्ता भारत के लिए खोलता है। यह रास्ता आगे साउथ-ईस्ट एशिया और भारत के व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगा। लेकिन पूर्वोतर में अब तनाव बढ़ गया है। इससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर को नुकसान पहुंचेगा।
दरअसल इस इलाके में नागरिकता कानून का विरोध मुस्लिम नहीं बल्कि हिंदू, इसाई और कई स्थानीय जनजातियां कर रही है।
शिंजो अबे का दौरा रद्द होना अच्छे संकेत नहीं
जिस समय नागरिकता संशोधन कानून को लेकर असम में आंदोलन शुरू हुआ उसी समय जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे का असम में दौरा प्रस्तावित था। दोनों मुल्कों के प्रधानमंत्री की बैठक असम में होनी थी। शिंजो अबे को मणिपुर भी जाना था। यह दौरा एक महत्वपूर्ण दौरा था, क्योंकि जापान और भारत मिलकर पूर्वोतर भारत के रास्ते ईस्ट एशिया के आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने को उत्सुक है। लेकिन असम में हुए हिंसक आंदोलन ने जापान के अंदर भारत की छवि पर सवाल उठाए हैं। शिंजो अबे का दौरा रद्द हो गया है। अब अगले साल आएंगे।
दरअसल, जापान की मीडिया ने पूर्वोतर में हुई हिंसा पर काफी गंभीरता दिखाई। इसे भारत की रणनीतिक भूल बताया गया। भारत की योजना थी कि जापान के प्रधानमंत्री नॉर्थ-ईस्ट के राज्य में बढ़िया स्वागत कर चीन को भी सांकेतिक संदेश दिया जाए। लेकिन नागरिकता कानून के पारित किए जाने की जल्दीबाजी में यह योजना फेल हो गई है।
एक तरह से देखा जाए तो नॉर्थ-ईस्ट में बंगालियों की घुसपैठ की समस्या काफी पुरानी है। पूरे नॉर्थ ईस्ट में इस मुद्दे पर हिंसा लंबे समय से होती रही है। आसाम का आंदोलन का आधार ही यही था। अब नागरिकता कानून ने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के दिमाग में यह भर दिया है कि बंगालियों को किसी भी कीमत पर सरकार यहां बसाएगी। उनके दिमाग से खासकर असमिया आबादी के दिमाग से यह बात निकालने में काफी समय लगेगा। खुद आसाम भाजपा के नेता आसाम में हुए आंदोलन से घबरा गए हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।