महिलाओँ पर यूं बाहर खुले में की जाने वाली हिंसात्मक प्रताड़ना पुरुष के वहशीपन का खुला प्रमाण है।
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इस पर प्रसिद्ध लेखिका ने भी सवाल उठाए हैं और बार-बार कहा है कि महिलाओँ पर यूं बाहर खुले में की जाने वाली हिंसात्मक प्रताड़ना पुरुष के वहशीपन का खुला प्रमाण है। जितनी घरेलू हिंसा एक अपराध है उससे कई गुना ज्यादा किसी महिला का यूं सार्वजनिक रूप से किया गया अपमान इतना गंभीर अपराध है कि इसकी सबसे कठोर सजा होनी चाहिए।
कानून अपनी जगह है पर, इनको लागू करने वाले भी ईमानदार होने चाहिए, नहीं तो कानूनों का जमीनी तौर पर कितना असर है यह हम सब जानते हैं। जब तक निचले स्तर तक यह बात नहीं पहुंचाई जाएगी कि किसी भी महिला का उत्पीड़न चाहे घर में हो या बाहर एक घोर अपराध है।
निचले स्तर से मतलब उन थानों से है जो दूर-दराज के इलाकों में हैं। वहीं इस तरह के अपराधों को होने से महिलाओं का बचाव कर सकते हैं। कई बार तो इन इलाकों में राजनीतिक सत्ता इतनी हावी होती है कि उसी के गुर्गे महिला या महिलाओं का इस तरह अपमान करते हैं।
एक घटना में तो ऐसे ही राजनीतिक सत्ता वाले बाहुबली के इशारे पर पुलिस वालों ने एक महिला को बेल्ट से पीटा। दरअसल, उस बाहुबली का एक कार्यकर्ता उस विधवा महिला की जमीन हथियाना चाहता था।
कानून को बेअसर व लाचार नहीं होना चाहिए। कानून का भय होना चाहिए। महिलाओं के प्रति होने वाली घरेलू व सार्वजनिक हिंसा की एक भी घटना नहीं हो तभी महिलाएं सम्मान से जी सकेंगी।
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