रसायनशास्त्र में नोबेल विजेता 2019
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क्या है लीथियम आयन बैटरी?
लीथियम आयन बैटरी को आधुनिक बैटरी भी कहा जाता है। लीथीयम बैटरी पर पहली कोशिश एमएस व्हिटिंघम द्वारा देखने को मिली। वर्ष 1970 में उन्होंने बीजली उत्पान के लिए टाइटेनियम सल्पफाइड और लिथियम मैटल का उपयोग किया था। यह पहला सफल प्रयोग कहा जा सकता है। हालांकि इसके बाद पूर्ण तरीके से बैटरी बनने में काफी समय लगा। 1980 में ऑक्सफोर्ड आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन गूडेनफ और कोईची मिजुशीमा ने रिचार्जेबल लीथीयम बैटरी को दिखाया। जॉन गूडेनफ को लीथीयम बैटरी का फादर भी कहा जाता है।
इस प्रयोग के बाद काफी प्रगति देखने को मिली। बीजली उत्पादन के लिए लीथीयम का उपयोग कई अन्य रसायन के साथ भी किया गया और अन्नतः 1991 में सोनी और असाही कासई द्वारा पहली लिथियम बैटरी को पेश किया गया। वहीं 1997 पहली बार लिथियम पॉलिमर बैटरी पेश किए गए। मोबाइल में लिथियम आयन और लिथियम पॉलिमर बैटरी का ही उपयोग होता है।
लीथियम आयन बैटरी रिचार्जेबल बैटरी श्रृंखला का ही एक कड़ी है। इसमें मुख्सयतः तिन तत्वों का संयोग हेाता है। नेगेटिव इलेक्ट्रोड , पोजेटिव इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रालाइट। बैटरी में कार्बन नेगेटिव इलेक्ट्रोड के लिए उपयोग होता है। जबकि आक्साइड का उपयोग पोजेटिव इलेक्ट्रोड के लिए किया जाता है। वहीं लिथियम साल्ड इलेक्ट्रोलाइट के लिए होता है।
लिथियम बैटरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वोल्टेज की जरूरत के अनुसार इसके संयोग को बढ़ा और घटा सकते हैं। वहीं इसे एक छोटे से पैकेट में भी बना सकते हैं। यही वजह है कि मोबाइल, लैपटाप बौर टैबलेट जैसे इलेक्ट्रानिंक्स डिवायस में ध्ड़ल्ले से इसका प्रयोग हो रहा है। बोल चाल की भाषा में इसे ली-आन बैटरी कहा जाता है।
लिथियम पालिमर बैटरी
लिथियम पालिमर बैटरी में लिथियम आयन के समान तकनीक का ही उपयोग होता है। इसमें लिथियम के साथ ठोस पालिथिन आक्साइड या पालिएक्रानलियोनिट्रील का उपयोग किया जाता है। लिआन बैटरी के समान यह भी छोटे से पैकेज में बनाया जा सकता है और उपयोग में आसान भी होता है। साधरणतः बोल चाल में इसे ली-पो बैटरी नाम से जाना जाता है।
ताकत मापने के लिए एमएएच का प्रयोग
लिथियम आयन और लिथियम पालिमर बैटरी दोनों में इसकी इसके ताकत मापने के लिए एमएएच का प्रयोग होता है। वास्तव में एमएएच इसके ताकत मापने का पैमाना है। बैटरी चार्ज को एंपियर आवर के माध्यम से मापा जाता है और छोटे डिवायस में चार्ज के लिए मिलि एंपियर आवर को पैमाना बनाया जाता है।
एमएएच का आशय होता है- मिलि एंपियर आवर 1मिलिएंपियर आवर एक एंपियर आवर का एक हजारवां भाग है। अर्थात् 1 एंपियर आवर = 1000 मिलिएंपियर। इस तरह एक बैटरी जितना ज्यादा एमएएच का होगा वह उतना ज्यादा बैटरी बैकअप देने में सक्षम होगा। मोबाइल में बैटरी न हो तो कुछ काम ही नहीं हो सकता लेकिन यदि बैटरी का उपयोग सही तरीके से न हो तो आपको आर्थिक या शारीरिक नुकसान भी हो सकता है।
ऐसे में कुछ सावधानियां भी रखनी होंगी मसलन मोबाइल को चार्ज करते समय कॉल न करें साथ ही चार्जिंग के दौरान यदि बैटरी ज्यादा गर्म हो तो जल्द से जल्द चार्जिंग निकाल दें और सर्विस सेंटर से संपर्क करें।
लिथियम आयन की फोन बैटरी यदि फूल गई हो तो उसे तुरंत निकाल दें। आज स्मार्टफोन के दौर में पावर बैंक का उपयोग काफी बढ़ गया है। इनमें भी ली-ऑन बैटरी का ही प्रयोग होता है लेकिन इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया होता है कि यह आपके फोन को चार्ज कर सके।
इन चार्जर को कंप्यूटर या लैपटाप के यूएसबी के माध्यम से चार्ज किया जा सकता है। साधारण बोलचाल की भाषा में इन्हें पावर बैंक कहा जाता है। कुलमिलाकर लीथियम आयन बैटरी की विकास और खोज तकनीक की दुनिया में बहुत युगांतकारी कदम है जिसने न सिर्फ लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक है।
(लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं )
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