चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में वीडियो कांड को लेकर हंगामा
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क्या हो सकती है ऐसी घटिया हरकत की वजह?
यहां बड़ा सवाल यह भी है कि संबंधित छात्रा ने ऐसा वीडियो क्यों बनाया? एक महिला के लिए महिला का स्नान करना कोई असामान्य और वीडियो रिकाॅर्डिंग की बात नहीं है, जब तक उसे किसी पुरूष की दूषित निगाह से न देखा जाए। इसीलिए महिलाओं के स्नान घर और बाथरूम अलग होते हैं। बावजूद वो छात्रा इसके वीडियो बनाकर अपने ब्वाॅय फ्रेंड को भेज रही थी तो इसके पीछे यकीनन कोई न कोई कारण रहा होगा। यह कोई दबाव हो सकता है या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा भी हो सकता है।
भारत में कई महिलाएं अब पोर्न उद्योग का हिस्सा भी जाने-अनजाने में बन रही है और पैसा भी कमा रही हैं। यह मामला भी उसी से जुड़ा हो सकता है। आरोपी छात्रा हॉस्टल की महिला वार्डन की शुरूआती पूछताछ में पहले तो सब छुपाती रही, लेकिन ज्यादा दबाव बनाने पर उसने अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने अपने दोस्तों के नाम भी बताए। उधर शिमला में उन दो कथित दोस्तों को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उनका कहना है कि उनके फेक अकाउंट से यह सब किया गया। सच्चाई क्या है, मामले की साइबर जांच में पता चलेगा।
मामले में अब जांच कमेटियों की रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हैं। कलेक्टर ने तत्काल मामले की मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया था। साथ ही एसडीएम के नेतृत्व में टीम बनाकर उसे सात दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। उधर विवि ने भी दो हॉस्टल वार्डनों को सस्पेंड कर दिया है और जांच बैठा दी है। एडीजीपी गुरप्रीत कौर के नेतृत्व में महिला अधिकारियों की जांच टीम बना दी है।
सवाल यह भी है कि अगर कोई छात्रा ऐसे नाजायज वीडियो बना रही थी तो इसकी खबर विवि प्रशासन को क्यों नहीं लगी? बताया जाता है कि वो अश्लील वीडियो लीक होने के बाद यूनिवर्सिटी की एक छात्रा के पास एक अंतरराष्ट्रीय काॅल भी आया, जिसमें काॅलर ने लड़की को यह कहकर धमकाया कि उसका वीडियो भी तैयार है। मुंह बंद न किया तो उसे भी वायरल कर देंगे।
पंजाब पुलिस का बयान काफी अजीबो-गरीब
इस मामले में पंजाब पुलिस का यह कहना गले उतरने वाला नहीं है कि युवती ने दोस्तों को नहाते हुए केवल अपना वीडियो भेजा, बाकी लड़कियों का नहीं। पुलिस का यह स्टैंड मामले को रफा-दफा करने का ज्यादा लगता है क्योंकि जब आरोपी छात्रा को अपना अश्लील वीडियो भेजने में झिझक नहीं थी तो दूसरी छात्राओं के वीडियो भेजने में क्यों होगी?
हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ ऐसे चल रहा था मानो रोजमर्रा की बात हो। उस आरोपी छात्रा ने एक क्षण के लिए भी यह नहीं सोचा कि जिस दिन इस खेल का भंडाफोड़ होगा, उसका नतीजा क्या होगा? खुद उस छात्रा के मां-बाप क्या सोचेंगे? वो छात्राएं कहां मुंह छिपाएंगी, जिनके वीडियो चुपके से बना लिए और भेज भी दिए गए।
यह कड़वी सचाई है कि आज हम उस दुनिया में जी रहे हैं, जब जीवन का कोई भी कोना रहस्य नहीं रह गया है। सब कुछ नेट पर उपलब्ध है। सरे आम बिक भी रहा है। इंटरनेट की दुनिया ने नैतिकता और अनैतिकता की लक्ष्मण रेखा को भी लगभग मिटा दिया है और इसका उल्लंघन करने वाला हर रावण बेशर्मी से हंस रहा है। इस घिनौने कांड का दोषी जो भी हो, लेकिन देश भर में हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं, कामकाजी महिलाओं के मन में इसने एक दहशत भर दी है।
देश में करीब 2 करोड़ छात्राएं उच्च अध्ययन कर रही हैं। यह संख्या हर साल बढ़ रही है। इनमें से लगभग एक तिहाई छात्राएं अलग-अलग हॉस्टलों में रहती हैं। चंडीगढ़ की घटना ने इन सब के सामने प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है कि उनकी निजता की सुरक्षा की गारंटी क्या है? हो सकता है कि आरोपियों का दोष सिद्ध हो जाए और उसे सजा भी मिले, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से हिली एक छात्रा द्वारा हॉस्टल छोड़ते समय किया गया एक कमेंट बहुत कुछ कहता है। उसने कहा कि-
हो सकता है कि जांच में यह मामला झूठा भी निकले, लेकिन अश्लील धंधों में लिप्त लोगों को महिलाओं की ब्लैकमेलिंग का नया हथकंडा मिल गया है, उसका क्या?
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