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दीपावली 2024: चांदी की खरीदी शुभ और फायदे का सौदा, शेयर बाजार में भी की जा सकती है खरीद

सार

बढ़ती टेक्नॉलॉजी के बावजूद भौतिक रूप से चांदी और सोना खरीदने की प्रथा कायम है। इसी से हमारे बाजार गुलजार रहते हैं।  इसके अलावा शेयर बाजार में सिल्वर माइनिंग कंपनियों के स्टॉक ऊंचे जा रहे हैं। सिल्वर ई टी एफ यानी सिल्वर ट्रेड फंड भी कारोबार कर रहे हैं।
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दिवाली पर लोग चांदी खरीदते हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिस चांदी के दाम अब एक लाख रुपये प्रति किलो छूने को हैं वह चांदी 1984 में करीब 3500 रुपये किलो थी। 10 साल बाद 1994 में उसके दाम बढ़कर करीब 7100 तक पहुंच गए। और उसके बाद 2004 में चांदी ने एकदम तेजी का रुख  पकड़ा और लगभग 12,000 किलो हो गई। 2014 में चांदी के दाम बढ़ते बढ़ते 43,000 के आसपास पहुंची लेकिन अब तो कीमतों ने आकाश ही छू लिया है। 

भारत के लोग दीपावली पर सोना या चांदी किसी न किसी रूप में ज़रूर खरीदते हैं। सोने की बढ़ती कीमतों के कारण भी चांदी का चलन बढ़ गया है।  अगर सोना बहुत सस्ता भी हो जाए, तब भी वह चांदी जगह नहीं  सकता। चांदी की चमक निवेश के रूप में साल दर साल बढ़ रही है। चांदी को शुभ माना जाता है।
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चांदी के सिक्के, चांदी के जेवर, चांदी की श्रीगणेश-लक्ष्मी की मूर्ति भारतीय परिवारों में सम्मान, आस्था और शान है। दीपावली खरीद के साथ ही यह ऐसा निवेश होता है जो पीढ़ियों के लिए होता है।  यह  निवेश संकट के क्षणों में यह काम आता है। चांदी हमारे घरों में सिक्कों, आभूषणों, भगवान की प्रतिमाओं, बर्तनों आदि में देखी जा सकती है। 

बढ़ती टेक्नॉलॉजी के बावजूद भौतिक रूप से चांदी और सोना खरीदने की प्रथा कायम है। इसी से हमारे बाजार गुलजार रहते हैं।  इसके अलावा शेयर बाजार में सिल्वर माइनिंग कंपनियों के स्टॉक ऊंचे जा रहे हैं। सिल्वर ई टी एफ यानी सिल्वर ट्रेड फंड भी कारोबार कर रहे हैं। इसके लिए सेबी की साफ गाइड लाइन है कि इन फंड्स का 95 प्रतिशत उपयोग केवल चांदी के कारोबार में ही किया जा सकता है।

सरकार ने खुद ही सिल्वर बांड्स भी जारी कर रखे हैं जिसे 'डिजिटल सिल्वर' कहा गया है। इसके कारण अब चांदी में निवेश के लिए सराफा बाजार जाने की ज़रूरत नहीं। शेयर बाजार में चांदी की खरीदी तो की सकती हैं, पर उस चांदी का भौतिक उपयोग नहीं जा सकता। 

दीपावली के आसपास चांदी की कीमतें कई कारणों से बढ़ जाती है। दीपावली हिंदुओं का पवित्र त्यौहार और इस दौरान चांदी के सिक्के, आभूषण, श्रीगणेश -लक्ष्मी की प्रतिमा, चांदी के पात्र के पात्र  आदि  सामान खरीदा जाता है। दीपावली के आसपास ही भारत में शादी - ब्याह का सीजन शुरू होता है।

खरीदी बढ़ जाती है जिसके कारण चांदी और सोने के दाम बढ़ जाते  है। भारत में परंपरा है कि हर शुभ अवसर पर बहन बेटियों को चांदी के आभूषण दिए जाते हैं। चाहे पहने के लिए कड़े  हो या पायजेब, कमरबंद हो या बाजूबंद। गरीब से गरीब आदमी भी अपने घर की बहू बेटियों को चांदी के आभूषण देने में संकोच नहीं करता। यह परंपरा भी है और निवेश भी।  यह फैशन में भी है और यह इमरजेंसी फंड भी!

पूरी दुनिया में चांदी के दाम  बढ़ते जा रहे हैं। इसका एक प्रमुख कारण मुद्रास्फीति तो है ही, अन्य कारण है औद्योगिक उपयोग में चांदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है। आजकल चांदी सोल्डर और ब्रेज़िंग में उपयोग में लाइ जाती है। बैटरियों, दांतों के इलाज, ग्लास कोटिंग, एलईडी चिप्स,दवाइयों, एक्स रे,  परमाणु रिएक्टर, टच स्क्रीन, पेयजल की शुद्धता जांचने के यंत्रों, शिपमेंट चेक करनेवाले आरएफआईडी चिप्स काम आती हैं। अब डिजिटल फोटोग्राफी लोकप्रिय होने से वहां उपयोग कम हो गया है।

भारत, चीन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी आदि में चांदी की औद्योगिक खपत लगातार बढ़ती ही जा रही है। चांदी बहुत ज्यादा फोटोवोल्टिक है, इस कारण सौर ऊर्जा में इसकी जरूरत ज्यादा हो गई है। चांदी में सबसे ज्यादा जीवाणुरोधी क्रिया होती है, इसीलिए चांदी  बर्तनों की मांग बानी रहती है और यह पशु कोशिकाओं के लिए भी सबसे सुरक्षित मानी जाती है।  पुराने ज़माने में दूध के बर्तनों में चांदी के सिक्के डालकर पेचिश जैसी बीमारी रोकी जाती थी। अस्पतालों के ऑपरेशन थियेटर में लगभग सभी यंत्रों में चांदी  उपयोग किया जाता है। 

चांदी का उपयोग बढ़ने से चांदी के दाम ज्यादा हो होते जा रहे  हैं। भारत में जैसे-जैसे संपन्नता रही है, वैसे वैसे लोग सोने और चांदी में निवेश ज्यादा करने लगे हैं। सोने के बाद चांदी के जेवर हर परिवार की पहली प्राथमिकता अभी भी  है। चाहे शादी ब्याह हो, किसी बच्चे का जन्म हो या और कोई भी शुभ घड़ी हो, चांदी हमारे लिए जरूरी हो जाती है।

चांदी स्थिरता और शक्ति का प्रतीक है। माना जाता है कि चांदी से पॉजिटिव शक्तियां करीब आती हैं, चांदी मन को शांति प्रदान करती है।  अगर आपके पास बहुत चांदी है, मतलब आप समृध्द हैं। दीपावली तो है ही समृद्धता की देवी लक्ष्मी का पर्व !

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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