केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश अपने लगातार 9वें वार्षिक बजट में तात्कालिक और लोक लुभावन लाभों की जगह चुनौतीपूर्ण माहौल में दीर्घावधि में देश की आर्थिक संरचना और स्थिरता को मजबूती देने पर ज्यादा जोर दिया है, जो आज वैश्विक आर्थिक राजनीतिक अनिश्चितता की दृष्टि से भी अहम है।
तीन कर्तव्य बोधों और युवा शक्ति संचालित इस बजट वर्तमान और भावी चुनौतियों के मद्देनजर कई योजनाएं और घोषणाएं हैं। इसमें राजनीतिक और आर्थिक दोनों लक्ष्यों को ध्यान में रखा गया है। बावजूद इसके अगर देश के शेयर बाजारों को यह बजट रास नहीं आया तो इसका मुख्य कारण निवेशकों की सावधानी, सरकार की वित्तीय नीतियों तथा वैश्विक आर्थिक-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कारण ज्यादा है। जिसमें टैरिफ की मार और घटता प्रत्यक्ष विदेशी निवेश शामिल हैं।
सेमी कंडक्टर और एआई पर ध्यान
इसके बाद भी अगर भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सात फीसदी से ज्यादा बनी हुई है तो इसकी वजह आर्थिक दृष्टि से भारत में ‘गोल्डीलाॅक्स’ (सही आर्थिक रफ्तार और समुचित रोजगार सृजन) स्थिति के चलते बाजार को और बेहतर, कल्पनाशील, साहसिक तथा ज्यादा रोजगारोन्मुखी बजट की अपेक्षा थी। अच्छी बात यही है कि वित्त मंत्री ने राजकोषीय घाटे को काबू में रखा है। आर्थिक वृद्धि विकास दर 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है।
सरकार ने अब सेमी कंडक्टर और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ने पर ध्यान दिया है, जिसमें भारत वैश्विक दौड़ में पिछड़ता नजर आ रहा था। वित्त मंत्री ने पर्यटन को आर्थिक विकास का ग्रोथ इंजन माना है।
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट को गौर से समझें तो वित्त मंत्री ने जिन राज्यों को सौगातों से खुश किया है, वो वही राज्य हैं, जिनमें इस साल अथवा अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जहां चुनाव नहीं हैं, उन राज्यों को कोई प्रत्यक्ष और भौतिक लाभ का जिक्र बजट में नहीं है। एक और राजनीतिक नुकसान भरपाई बापू के नाम पर ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना’ की घोषणा के रूप में की गई है। यह खादी को बढ़ावा देने की योजना है।
गौरतलब है कि पिछले साल सरकार ने पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना में से गांधी का नाम हटाकर उसे जी-राम-जी योजना में तब्दील कर दिया था। जिसका विपक्ष ने और खासकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध करते हुए इसे बापू का अपमान करार दिया था। हालांकि सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस आरोप का खंडन किया, लेकिन इसकी नुकसान भरपाई के रूप में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना लाई गई है। हालांकि खादी और ग्राम स्वराज के बीच क्या तार्किक सम्बन्ध है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
तीन कर्तव्य बोधों वाला बजट
वित्तमंत्री ने इस बात का गर्व के साथ उल्लेख किया कि यह पहला वार्षिक बजट है, जो कर्तव्य भवन में तैयार हुआ है। लिहाजा यह बजट भी तीन कर्तव्य बोधों से प्रेरित है। पहला कर्तव्य यानी सतत और स्थायी आर्थिक विकास दर को बढ़ावा देना, दूसरा है गरीब, कमजोर और वंचितों का ख्याल रखना और तीसरा कर्तव्य है भविष्य के लिए आर्थिक विकास की बुनियाद को मजूबत करना।
वित्त मंत्री का मानना है कि आर्थिक व्यवस्था में ढांचागत सुधार करने, पूंजीगत व्यय बढ़ाने, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा रोजगार सृजन में वृद्धि अर्थ व्यवस्था को बल और गति मिलेगी, जिससे भारत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक मजूबती के साथ खड़ा रह सकेगा। हालांकि आर्थिक जानकारों का कहना है कि देश में रोजगार बढ़ तो रहा है, लेकिन अस्थायी गिग वर्कर्स के रूप में, जिनकी नौकरी और रोजगार की कोई गारंटी नहीं है।
युवाओं को स्थायी और निरंतर रोजगार चाहिए, जो उनके जीवन में आर्थिक सुरक्षा की गारंटी बन सके। भारत में बड़ी समस्या श्रम आधारित उद्दयोगों में ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की है। यह चुनौती एआई आने से और बढ़ गई है, जिससे निपटने के लिए किए जा रहे उपायों में भारत अन्य देशों की तुलना में अभी पीछे है।
पिछले बजट से 4 लाख करोड़ रू अधिक
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट में कुल खर्च अनुमान 53.5 लाख करोड़ रू. है, जो वर्ष 2025 26 की तुलना में करीब 4 लाख करोड़ रू. ज्यादा है। सकारात्मक बात यह है कि सरकार अधोसंरचना विकास पर लगातार बल दे रही है। इनमें सड़क, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दवा उद्योग भारत की निर्यात व्यवस्था का बड़ा घटक है। वित्त मंत्री ने बजट में 'औद्योगिक संप्रभुता' का दांव चलते हुए ‘बायो फार्मा शक्ति’ के लिए 10,000 करोड़ और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स के लिए ₹40,000 करोड़ रू. के खर्च का प्रस्ताव रखा है ताकि भारत औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बने। इसे रिफॉर्म एक्सप्रेस की संज्ञा दी गई है।
इसके तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी' यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। बायो फार्मा शक्ति के अंतर्गत ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य है।
इसके तहत देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। बजट में 40 हजार करोड़ रू. का प्रावधान कर 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। ताकि इस क्षेत्र के लिए स्किल्ड वर्क फोर्स तैयार किया जा सके।
दुनिया में दुर्लभ खनिजों के लिए चल रही मारामारी के बीच बजट में ‘रेयर अर्थ मिशन’ शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए चार राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का चयन किया गया है। ताकि दुर्लभ खनिजों का आयात कम कर हम घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भर हो सकें। बजट में छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बढ़ती प्रतिस्पर्द्धा और सरकार की नीतियों के चलते एमएसएमई मुश्किल में हैं।
केन्द्रीय बजट में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने, कैंसर के इलाज के लिए जरूरी 17 दवाएं सस्ती करने का ऐलान है। इसके लिए देश में पांच बड़े मेडिकल हब बनाए जाएंगे। साथ ही अगले 5 वर्षों में 1 लाख सहायक स्वास्थ्य कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। 1.5 लाख केयर गिवर्स भी तैयार किए जाएंगे। एम्स की तर्ज पर देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खुलेंगे। उत्तर प्रदेश में एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान खोला जाएगा।