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बजट 2023-24: 'अमृतकाल' के पहले बजट में 'अमृत' खोज रही जनता

सार

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट था। इस साल नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और अगले साल सरकार लोकसभा चुनाव में जाएगी तो उम्मीद थी कि यह चुनावी बजट होगा, लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिला।
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नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट था - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 'अमृतकाल' के पहले बजट में जनता निश्चित रूप से 'अमृत' खोज रही होगी। कोई भी बड़ा रिस्क लिए बिना सीतारमण ने सभी वर्गों को कुछ न कुछ देने की कोशिश की है। हालांकि, मध्य वर्ग टैक्स स्लैब में बदलाव से कितना खुश होगा? यह कहना मुश्किल है, क्योंकि लंबे अर्से बाद बदलाव (5 लाख के बजाय 7 लाख रुपए तक इनकम टैक्स में छूट) तो हुआ है, पर बहुत अधिक फायदा मिला, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

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इनकम टैक्स की रियायत नई या वैकल्पिक टैक्स स्कीम तक सीमित है, जहां बचत करने, बीमा या होम लोन लेने पर कोई प्रोत्साहन या छूट नहीं है। इस स्कीम में टैक्स स्लैब भी बदले गए हैं। साफ है, नई स्कीम अब तक करदाताओं को बहुत अधिक लुभा नहीं पाई है। अधिकांश टैक्सपेयर्स पुरानी स्कीम में ही हैं। आपको अपने सीए के पास जाकर ही इसे समझना होगा। कर्ज लेने वाले मध्य वर्ग को आयकर में कोई बड़ी राहत नहीं दी गई है। निश्चित ही वो निराश होगा।

बजट को बजट की तरह पेश करने की कोशिश

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट था। इस साल नौ राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं और अगले साल सरकार लोकसभा चुनाव में जाएगी तो उम्मीद थी कि यह चुनावी बजट होगा, लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिला। सीतारमण ने बजट को बजट की तरह पेश करने की कोशिश की। इसे चुनावी बजट नहीं बनने दिया।

हालांकि, कोई बहुत बड़ी योजनाएं इस बार घोषित नहीं की गई हैं। जैसा सीतारमण ने बजट की सात प्राथमिकताएं, जिन्हें उन्होंने सप्तऋषि कहा, पर ही फोकस करने की कोशिश की। उन्होंने समावेशी विकास, अंतिम छोर-अंतिम व्यक्ति तक पहुंच, बुनियादी ढांचा और निवेश, निहित क्षमताओं का विस्तार, हरित विकास, युवा शक्ति और वित्त क्षेत्र पर ध्यान लगाया।

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कोरोना काल में गरीबों के लिए शुरू की गई अंत्योदय योजना को एक साल के लिए बढ़ाया गया है, यानी जनवरी 2024 तक गरीबों को मुफ्त अनाज मिलता रहेगा। इस पर सरकार के दो लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में सरकार ने देखा है कि इस योजना का लाभ उसे मिला है। उम्मीद यही है कि जनवरी 2024 से आगे इस योजना को जारी रखा जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना का बजट 66% बढ़ाकर 79 हजार करोड़ रुपए किया गया है। इसका सीधा लाभ 3 करोड़ गरीब परिवारों को मिलेगा, यानी सरकार की नजर लाभार्थी वर्ग पर सीधे-सीधे है।

रेलवे का बजट बढ़ाया गया

सरकार का जोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। इसमें 33% की बढ़त करके इसे 10 लाख करोड़ रुपए किया गया है। हालांकि, बीते साल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अच्छा नहीं रहा। अधिकांश परियोजनाएं पिछड़ी हुई हैं। सड़क निर्माण की हालत सही नहीं है। रेलवे का बजट बढ़ाया गया है। 50 और एयरपोर्ट, हेलीपैड, पोर्ट के पास पैड या तो बनाए जाएंगे या फिर उन्हें रिवाइव किया जाएगा। इतना बड़ा पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर में लगेगा तो निश्चित रूप से रोजगार बढ़ेंगे और सरकार वर्ष 2024 में लाभ लेने की कोशिश करेगी।

तीन कृषि कानूनों पर घिर चुकी मोदी सरकार ने किसानों को रिझाने की कोशिश की है। सरकार एक करोड़ किसानों को ऑर्गेनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। इसके लिए 10 हजार बायो इनपुट रिसर्च सेंटर बनाए जाएंगे। गोवर्धन योजना पर 10 हजार करोड़ का आवंटन किया गया है। मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए भी 2200 करोड़ का फंड जारी किया गया है।

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नई घोषणाओं की बात है तो महिला सम्मान सेविंग स्कीम की घोषणा की गई है - फोटो : Agency (File Photo)

श्री अन्न योजना की घोषणा बजट में की गई है। वैसे भी, इस साल प्रधानमंत्री मोदी ने मिलेट्स वर्ष घोषित किया हुआ है। सरकार जौ, बाजरा, रागी, कुट्टू का प्रोडक्शन बढ़ाने की बात कह रही है। इसका लाभ किसानों को मिलेगा। कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ किया गया है। खेती और किसानों को लेकर और भी कई घोषणाएं की गई हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री सम्मान निधि की धनराशि को नहीं बढ़ाया गया है, जैसे उम्मीद लगाई जा रही थी।

ग्रीन एनर्जी पर जोर

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने ग्रीन एनर्जी पर जोर दिया है और ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम को पर्यावरण सुरक्षा कानून के तहत लाने की बात कही है। प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों की रिप्लेसिंग को महत्वपूर्ण काम माना है और कहा है कि यह सतत ऊर्जा की राह में बड़ा कदम है।

केंद्र सरकार पुरानी गाड़ी और एंबुलेंस को नष्ट करने में मदद करेगी और इसके लिए राज्य सरकारों को भी मदद दी जाएगी। इसे अच्छा कदम कहा जा सकता है, क्योंकि प्रदूषण को लेकर देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब होती है और जनता स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जूझती है।

ये भी हैं कुछ घोषणाएं

जहां तक नई घोषणाओं की बात है तो महिला सम्मान सेविंग स्कीम की घोषणा की गई है, जिसमें बेटी महिला के नाम पर 2 लाख की बचत पर 2 साल तक 7.5 प्रतिशत का ब्याज तय किया गया है। हालांकि, बचत को बढ़ावा जरूर मिलेगा, लेकिन यह उम्मीद से कम है। शिक्षा के क्षेत्र में 2 नई स्कीम्स की घोषणा की गई है।

क्षेत्रीय भाषाओं के लिए डिजिटल लाइब्रेरी और एकलव्य स्कूल बनेंगे। इसके लिए 38,000 टीचर्स की भर्ती होगी। एक घंटा 27 मिनट लंबे बजट भाषण में वित्त मंत्री ने एमएसएमई, बैंकिंग, रोजगारों, डिजिटल इंडिया, जल जीवन मिशन, युवाओं आदि को लेकर भी बहुत कुछ कहा है, लेकिन अधिकांश में पिछले बजट का एक्सटेंशन ही है।

पेट्रो पदार्थों कीमतों में बदलाव की उम्मीद पाले मध्य वर्ग को थोड़ी निराशा हुई है। उम्मीद थी कि गैस सिलेंडर और पेट्रोल की कीमतों में कुछ राहत सीतारमण देंगी। प्रधानमंत्री की ड्रीम योजना आयुष्मान भारत पर कोई नई घोषणा नहीं की गई है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह बजट एक बैलेंस बजट है, जिसमें न तो जोखिम है और न ही कोई उत्साह है, सिर्फ काम चलता रहे, यही सरकार की कोशिश है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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