मकान, गाड़ी, बचत, बच्चों की हायर एजुकेशन आदि को पूरा करने में महिलाओं की आय का अंश अधिक होता है। इसे वे अपनी छोटी बचत और निवेश से मैनेज करती हैं। छोटी बचत महिलाओं की आदत है। यह उनके बड़े सपनों को साकार करने में मददगार साबित होती है। जिसका फायदा पूरे परिवार को मिलता है। पर इस ओर बजट में कोई ध्यान नहीं दिया गया है। अपने घर का सपना अब भी महिलाओं की आय पर ही निर्भर रहा है। पुरुषों का पैतृक संपत्ति में हक रहा है और वे उसका इस्तेमाल भी करते हैं। जबकि महिलाओं के लिए अपने घर का सपना पूरा करने में होम लोन ने बहुत मदद की है। इन्कम टैक्स में होम लोन पर मिलने वाली छूट भी इसमें खासी मददगार साबित हुई है। पर नए टैक्स स्लैब में कर पर मिलने वाली छूट का अगर आप इस्तेमाल करना चाहती हैं, तो आपको पिछली तमाम तरह की छूट को छोड़ना होगा। और अगर आप बचत और निवेश पर मिलने वाली छूट का लाभ लेना चाहती हैं, तो आपको पिछले स्लैब पर ही टैक्स देना होगा। इससे बचत की आदत, बैंकों की बचत योजनाओं और ऋण योजनाओं से होने वाले लाभ को भी नुकसान पहुंचेगा।
पिछली एक तिमाही में पब्लिक सेक्टर को बहुत नुकसान पहुंचा है। मंदी प्रत्यक्ष रूप से नजर आई है। ऑटो सेक्टर में भी यह नुकसान साफ दिखाई दिया है। रोजगार के साधन कम हुए हैं। महिलाओं की एक्टिव वर्किंग लाइफ पुरुषों के मुकाबले कम होती है। सरकारी पदों को छोड़ दिया जाए तो असंगठित और निजी क्षेत्र में अब भी महिलाओं को पुरुषों के बराबर वेतन और भत्ते नहीं मिल पाते हैं। मंदी और कॉस्ट कटिंग का खामियाजा भी महिलाओं को ही अधिक भुगतना पड़ा है। पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के सामाजिक- आर्थिक तनाव को समझना और मानना भी बहुत जरूरी है। पर इन मोर्चो पर बजट ने निराश किया है। यही वजह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण पूरा होते ही संसद में बैठे सत्ता पक्ष के लोगों ने मेजे थपथपाकर उनका स्वागत किया। जबकि सेंसेक्स धड़ाम हो गया। बैंकिंग, रियल एस्टेट के शेयर गिरने शुरू हो गए। खासतौर से बजट के लिए सेंसेक्स शनिवार को खुला और बंद होते 988 अंक टूट गया। जिससे निवेशकों के 3.6 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ। यह मौजूदा मंदी के कोढ़ में निराशाओं के खाज के संकेत हैं। वित्तमंत्री ने भले ही इसे एस्पिरेशनल इंडिया का बजट कहा हो पर यह भारत की मौजूदा आर्थिक आकांक्षाओं को संबोधित करने में असफल रहा है। खासतौर से महिलाओं के लिए तो यह कुछ भी पॉजीटिव नहीं लेकर आया।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।