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देश की मिट्टी का हिस्सा बनने की खुशी विदेशी सुख सुविधाओं में कहीं बढ़कर

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Taiwan - फोटो : Social Media
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मैं सुशील अग्रवाल, सिरसा जिला के एक गांव नाथूसरी कलां का निवासी हूं। इस समय ताईवान में पीएचडी की शिक्षा ले रहा हूं। घर से बाहर किसी दूसरे देश में रहने का मेरे जीवन का यह पहला अवसर है। यहां रहकर मैने ये महसूस किया है कि विदेश हर मायने में हमारे देश से अच्छे हैं, चाहे वो स्वच्छता का मामला हो, कानून का पालन करने का हो, देशभक्ति का हो, रहन सहन का हो आदि।

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ये सच है कि यहां रह कर कभी भी इस तरह की भौतिक समस्या मुझे नहीं आई। मगर हर पल मेरे गांव की याद मेरे साथ चलती है। मैं हर समय मेरे गांव की गलियां, मेरा घर, दोस्त मित्र और वहां के माहौल की कमी महसूस करता हूं। यहां के पिज्जा बर्गर कहां उन चूल्हे की रोटियों की बराबरी कर सकते है जिनमे पौष्टिकता और प्यार दोनों होता है।

अपने देश की हर भौतिक और अभौतिक वस्तु में हमारा कुछ हिस्सा है, जिसको हम उससे दूर रह कर ही महसूस कर सकते हैं।

यहां रहकर मैंने यह जाना की अपनों का प्यार जो हमे हमेशा मिलता रहता है, वो हमें पास रहकर महसूस नहीं होता। उसकी कीमत दूर रहकर ही मालूम होती है। हालांकि मुझे यहां कोई उम्र भर के लिए नहीं रहना है पर इस थोड़े समय में ही हर चीज़ की कमी में अपने जीवन में महसूस करता हूं। देश से बाहर रह कर "अमर उजाला" के सहारे सुबह के कुछ पल ऐसे व्यतीत करने की कोशिश करता हूं कि जैसे अपने घर में ही सुबह की चाय के साथ अमर उजाला पढ़ रहा हूं।
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अपने देश की मिट्टी की वहां के वातावरण की एक अलग ही आबोहवा है जो किसी दूसरी जगह नहीं मिलती। अपने देश के तीज त्यौहार, मेले, धार्मिक उत्सव, सामाजिक उत्सव और शादी ब्याह यहां कहां देखने को मिलते हैं। हम दूसरे देश में कितनी ही तरक्की कर लें, हम वहां के लिए प्राथमिक नहीं बन सकते, हम सिर्फ अपने घर में ही प्राथमिक हैं, अपने देश में ही ये सुकून ले सकते हैं।

कई बार मैंने ये महसूस किया कि अपने देश का एक बहुत बड़ा तबका कैसे अपना देश, अपना परिवार छोड़ कर बाहर रह लेता है और मैने यह भी निष्कर्ष निकाला कि सिर्फ व्यवस्था से परेशान होकर लोग देवताओं की वासक भारत भूमि को छोड़ रहे हैं। अन्य कोई वजह है ही नहीं। अपने देश में न तो सरकार नागरिकों के लिए कुछ कर रही हैं और न नागरिक सरकार के लिए कुछ कर रहा है। ये कड़वा सच है। विदेश में दोनों अपने अपने अधिकार और कर्त्तव्य का निर्वहन कर रहे है तो प्रजा और सत्ता दोनों सुखी है।

मैं निष्कर्ष के रूप ये कह सकता हूं कि अगर हम अपना नागरिक धर्म सही से निभाएं और सरकार आम नागरिक की रक्षा के लिए वास्तविकता के धरातल पर काम करें तो भारत भूमि से बढ़कर कोई अन्य कोई ऐसी महान भूमि इस विश्व में नहीं है।

बेशक मेरा देश मुझे वो सुख सुविधाएं न दे सके जो मुझे विदेश ने दी है, लेकिन यह सच है कि भारत देश की मिट्टी का अंश बनना इन सुख सुविधाओं से कहीं बढ़कर मेरे लिए मायने रखता है।

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सुशील अग्रवाल " नाथूसरी "
पीएचडी स्कॉलर
नेशनल च्याओ तुंग यूनिवर्सिटी,सिंचू ,ताईवान
sushilmlaggarwal@gmail.com
+886-958818243
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