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टेस्ट क्रिकेट के रंग: दम तोड़ गया 'बैजबॉल', भारत को मिल गई नई टीम

सार

मैं आप सभी को एक बिल्कुल नई टीम की कल्पना करने को कह रहा हूं जिसमें आज के दौर में से न रोहित हों और न ही विराट। अश्विन और बुमराह भी नहीं हों, शमी भी नहीं। हां रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव अभी कुछ साल रहेंगे।
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भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम - फोटो : BCCI
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विस्तार
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वैसे तो भारत और इंग्लैंड के बीच चौथा ही टेस्ट मैच चल रहा है लेकिन अभी तक के मैचों से दुनियाभर के क्रिकेट को बड़े संदेश मिले हैं। सबसे बड़ा सबक तो इंग्लैंड के लिए ही है।

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इसमें कोई दो राय नहीं कि बैजबॉल ने टेस्ट क्रिकेट में नया रोमांच पैदा किया है। मैं खुद इंग्लैंड के सारे मैच देखता हूं। एशेज सीरीज में इसी के सहारे अंग्रेजों ने दम दिखाया तो भारत में आते ही मैच जीतना बड़ी बात हो गई। हालांकि इंग्लैंड अपने कप्तान बेन स्टोक्स से ही नहीं सीख पा रहा है और यही वजह कि चौथे टेस्ट मैच में बैजबॉल दम तोड़ गया।

इंग्लैंड को आखिर पारंपरिक खेल पर लौटना ही पड़ा। उसके सभी पुराने दिग्गजों ने विकेट फेंकने की आदत पर खूब फटकार लगाई। जो रूट जैसे बड़े खिलाड़ी लगातार फेल हो रहे थे। आखिर चौथे टेस्ट की पहली पारी में जो रूट अपने ही अंदाज में खेले और शतक लगाया। जैसे कि बात हो रही थी बेन स्टोक्स से सीखने की तो उनके खेल को समझना जरूरी है।
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पिछली दस से ज्यादा पारियों को देखें तो स्टोक्स पहले आराम से विकेट पर टिकते हैं और अंतिम क्षणों में छक्कों और चौकों की बरसात करते हैं। जो रूट, ऑली पोप और बेयरस्टो मानो पहली गेंद से ही टी-20 अंदाज में खेलना चाहते हों और विकेट देते रहे।

सच पूछिए तो क्रिकेट के प्रशंसक के तौर पर मैं बैजबॉल का खूब आनंद उठाता हूं लेकिन यह भी लगता है कि परिस्थिति के अनुसार रणनीति बदल भी लेनी चाहिए, इसलिए जब चौथे टेस्ट की पहली पारी में आंकड़े सामने आए तो साफ दिख गया कि भारत की सरजमीं पर बैजबॉल कारगर नहीं रहा। मुझे नहीं लगता कि इंग्लैंड बैजबॉल को छोड़ देगा लेकिन इतना तो तय है कि अपनी रणनीति में थोड़ा बदलाव जरूर करेगा। इसके लिए भारत का यह दौरा याद भी किया जाएगा।

आने वाले वर्षों में भारत की संभावित टीम

सबसे खास बात भारतीय क्रिकेट के चाहने वालों के लिए ये बिल्कुल अलग तरह के दिन हैं। दिग्गजों से भरी टीम में भारी भरकम नाम हर एक मैच के बाद कम होते जा रहे हैं। इस मैच में बुमराह नहीं खेले तो एक और बड़ा नाम कम हुआ। बैटिंग में जब सरफराज, जुरेल और पाटीदार के नाम जुड़ जाएं तो आप अंदाजा लगाइए कि किस तरह की नई टीम खड़ी हो रही है। रोहित शर्मा संभव है कि अभी कप्तानी के नाम पर कुछ दिन और खेलें और विराट की भी वापसी हो। इन सबके बीच अंगड़ाई लेती युवा खिलाड़ियों की जवानी भारतीय क्रिकेट को नए फलक पर पहुंचाने को तैयार है। 

यशस्वी जायसवाल ने अपना दम दिखा ही दिया है। कुछ जानकार यह भी कह सकते हैं कि हम कुछ मैचों में ही अपने हीरो तलाश लेते हैं और फिर वह खो जाते हैं। ऐसा हुआ है और होता भी है लेकिन यशस्वी की तकनीक और हौसले को देखते हुए कहा जा सकता है कि भारत को एक बड़ा खिलाड़ी और अच्छा ओपनर मिल गया है।

कुछ इसी हिम्मत और हौसले से मुझे सरफराज ने प्रभावित किया। घरेलू क्रिकेट में इतने समय तक पकने के बाद वह साफ तौर पर बेहतर करते दिखे हैं। पंत के बाद विकेटकीपर की खोज में भरत को कई मौके मिले लेकिन वह फायद नहीं उठा पाए। दुआ करिए कि पंत की शानदार वापसी हो लेकिन ध्रुव जुरैल भी अब आपको भविष्य में भारतीय टीम का हिस्सा बनते अक्सर दिखाई दे सकते हैं।       

दिग्गजों के बिना टीम इंडिया

दरअसल मैं आप सभी को एक बिल्कुल नई टीम की कल्पना करने को कहा रहा हूं जिसमें आज के दौर में से न रोहित हों और न ही विराट। अश्विन और बुमराह भी नहीं हों, शमी भी नहीं। हां रविंद्र जडेजा और कुलदीप यादव अभी कुछ साल रहेंगे।

ओपनिंग के लिए यशस्वी के साथ रितुराज गायकवाड़ हो सकते हैं। शुभमन गिल नंबर तीन पर ही रहेंगे। नंबर चार पर अभी रजत पाटीदार एक दावेदार हो सकते हैं लेकिन इस जगह के लिए कई युवा तैयार हैं। भविष्य में यदि श्रृषभ पंत विकेट कीपिंग न कर पाए तो एक बल्लेबाज के तौर पर इस स्थान पर खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं। मैं अपनी भविष्य की टीम में कप्तान भी उन्हें ही देखना चाहूंगा। उनके न होने पर छठे नंबर पर आने वाले रविंद्र जड़ेजा इस जिम्मेदारी को निभा सकते हैं। 

पांचवे नंबर पर सरफराज टिकेंगे भी तो वक्त आने पर तेज बैटिंग भी कर सकते हैं। वैसे ऐसा भी लगता है कि सरफराज का बैटिंग ऑर्डर बदलता भी रहेगा। छठे नंबर पर रविंद्र जडेजा की बात हो चुकी है। सातवें पर ध्रुव जुरैल रहने चाहिए। अब बात आती है चार गेंदबाजों की। एक गेंदबाज जड़ेजा हो ही चुके हैं। टेस्ट में कुलदीप की जगह पक्की रहेगी। इस टेस्ट में कुछ बैटिंग करके वह आठवें नंबर के बल्लेबाज भी होंगे। गेंदबाजी में सिराज का स्थान भी पक्का ही रहेगा। इस तरह से नौ तो लगभग तय से हो गए हैं। बाकी दो स्थानों के लिए लड़ाई रहेगी।

भारतीय पिचों पर इनमें से एक स्पिनर रहेगा तो विदेश पिचों पर दोनों तेज गेंदबाज। कई नाम जेहन में तो आ रहे हैं लेकिन अभी कोई स्थायी दावेदार समझ नहीं आ रहा है। आकाशदीप भी एक नाम हो सकते हैं। तो तैयार रहिए इन नामों के साथ अगले कम से कम पांच साल भारतीय क्रिकेट टीम का सफर तय करने के लिए।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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