बलवंत राय मेहता समिति में भी कुछ कमियां थीं, उन कमियों को दूर करने के लिए 1977 में अशोक मेहता समिति का गठन किया गया। इस समिति का मूल यह था कि इस समिति ने ग्राम पंचायत को खत्म करने की सिफारिश की परंतु इसे नामंजूर कर दिया गया। बलवंत राय मेहता ने पंचायतों को और सशक्त बनाने के लिए पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की थी। वर्ष 1993 में संविधान के 73वें संशोधन द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता मिली थी, जिसका उद्देश्य देश के सभी ग्राम पंचायतों को अधिक से अधिक अधिकार देकर उन्हें और मजबूत बनाना था।
हम सभी जानते हैं कि वर्तमान समय में पंचायती राज विषय राज्य की सूची में है। ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत महिलाओं को ग्राम पंचायत में एक तिहाई सीटें आरक्षित की गई थीं, परंतु गांव अब भी आत्मनिर्भर नहीं हो सके, जबकि यह पंचायती व्यवस्था के लक्ष्यों में से एक है। पंचायती राज संस्थाएं अभी सरकारी अनुदान पर ही निर्भर है। उन्हें अपनी वित्तीय व्यवस्था को सुधारने का प्रयास करना चाहिए तथा इसके नए रास्ते खोजे जाने चाहिए।
भारत में 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि 1993 में इसी दिन को 73वां संविधान संशोधन करके पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता दी गई थी। महात्मा गांधी ने जो स्वराज का सपना देखा था, उसमें हुए हर गांव को जोड़ना चाहते थे। वे चाहते थे कि हर गांव इतना आत्मनिर्भर हो कि अपनी सरकार खुद चला सके। इसके लिए आवश्यक है कि हर गांव की पंचायत मजबूत हो। बलवंत राय मेहता ने गांधी जी के सपने को पूरा किया। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें शत-शत नमन कर रहा है।