अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसले पर हर भारतीय ने परिपक्व दृष्टि दिखाई।
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सऊदी अरब और पाकिस्तान से सबक ले भारत के हिंदू और मुसलमान
दरअसल, इस देश के मुस्लिम और हिंदुओं दोनों को समझना होगा कि उनके बच्चों का भविष्य उनके हाथों मे है। यह दोनों समुदायों ने फैसला करना है कि वे अपने बच्चों को कट्टरपंथियों के हवाले करना चाहते हैं या एक उज्जवल भविष्य देना चाहते हैं। सारी दुनिया बदल रही है।
किसी जमाने में कटटरपंथियों को भारी आर्थिक मदद देने वाला सऊदी अरब आज बदल रहा है। उस मुल्क में महिलाओं को अधिकार दिए जा रहे हैं। वहां देश के विकास के लिए नई योजनाएं बनाई जा रही हैं। पड़ोसी पाकिस्तान एक उदाहरण है, जहां कट्टरपंथियों और जेहादियों ने पिछले 15 सालों में लगभग 1 लाख मुसलमानों की जान ले ली है।
हिंदुओं को भी पाकिस्तान से सीख लेने की जरूरत है। अगर वो हिंदू स्टेट बनाने की सोच रहे हैं, तो पाकिस्तान की तरफ एक नजर जरूर डालें जो अपने आप को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान कहता हैं। जैसे पाकिस्तान में कट्टर जेहादी आतंकी संगठनों ने अपने ही मुसलमानों को निशाना बनाया वैसे ही हिंदू कट्टरपंथ अपने ही समुदाय को निशाना भविष्य में बनाएंगे।
पाकिस्तान में जेहादियों ने उन लीडरों को भी निशाना बनाया जिन्होंने किसी समय में उन्हें संरक्षण दिया था। कट्टरपंथ और जेहाद ने पाकिस्तान को कहीं का नहीं छोड़ा।
आज देश चलाने के लिए पाकिस्तानी लीडरशीप विदेशों में पैसा मांगती फिरती है। आज इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान को भी बदलना पड़ रहा है। जेहाद ने पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को 123 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया। आज पाकिस्तान अपने आर्थिक विकास के लिए, धार्मिक पर्यटन के विकास के लिए सिख गुरुओं से संबंधित धर्मस्थली का विकास करने की योजना बना रहा है। करतारपुर इसका उदाहरण है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सभी ने स्वीकार किया।
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बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य देश की मख्य समस्या
दोनों समुदाय के बीच बनी खाई को पाटने के लिए सोच में बदलाव लाना होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंदुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण राम जन्म भूमि हिंदुओं को मिल गया है। अब हिंदू संगठन अपने बाकी धर्मस्थलों के दावों को छोड़ देश के विकास का खाका तैयार करे। देश की आर्थिक हालत खराब है। विकास दर नीचे जा रही है। देश के बैंकों की हालत खराब है। उद्योग धंधे चौपट हो रहे हैं।
पिछले पांच सालों में 90 लाख रोजगार प्राप्त लोग बेरोजगार हो गए हैं। शहरों में बेरोजगार युवा अब गांवों में मनरेगा में जाकर अपना पंजीकरण करा रहे हैं। गांवों मे किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अगर भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं तो भविष्य में मंदिर-मस्जिद और हिंदू मुस्लिम विवाद से दूर रहना होगा। अगर इसी तरह का माहौल रहा तो भविष्य में भारत में बड़ा निवेशक आने से डरेगा। आज पाकिस्तान मे बाहरी निवेशक आने से डरते हैं।
भारत में इस्लामिक शासन को कट्टर नजरिए से न देखे हिंदू
हमें इतिहास के अच्छी चीजों का गहन अध्ययन करना होगा। इस देश के बहुसंख्यक हिंदू इस्लामिक काल को शक के नजरिए से न देखें। वो इस्लामिक काल और खासकर मुगलों के काल का तार्किक अध्ययन करें। मीरबाकी और बाबरी मस्जिद के आधार पर मुगलों का मूल्यांकन न करें।
हिंदू मुगलकाल की बुराइयों को सिर्फ न देखे। बहुत अच्छे काम भी इस मुगल काल में हुए। यह सच्चाई है कि इस्लामिक युग में हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया। एक दूसरी सच्चाई भी है कि मुगल शासकों ने हिंदू मदिरों को दान भी दिया।
औरंगजेब कट्टर था, लेकिन उसी के कार्यकाल में बिहार के बोधगया स्थित शैव मठ को एक बड़ी जमींदारी मिली। यही नहीं कई और हिंदू मंदिरों को भी औरंगजेब ने दान दिए। औरंगजेब के दरबार में महत्वपूर्ण मंत्रियों में हिंदू समुदाय के लोग भी थे। अब इससे आगे बढ़िए।
इतिहास बताता है कि मुगल काल में विश्व अर्थव्यवस्था की कुल जीडीपी में भारत का योगदान 25 प्रतिशत था। मुगल काल में सिर्फ पचास साल के अंदर चीन की जीडीपी को भारत ने पछाड़ दिया था। जबकि आज चीन के सामने हम कहां है। 1980 के आसपास भारत और चीन का जीडीपी लगभग बराबर था।
आज चीन का जीडीपी भारत से पांच गुणा ज्यादा बड़ा है, क्योंकि 1980 के बाद भारत के लोग और मंदिर और मस्जिद के विवाद में लग गए। एक अल्लाह ओ अकबर का नारा लगा रहा था तो एक जय श्री राम का नारा लगा रहा था। दूसरी तरफ चीन तेज गति से अपना तेज आर्थिक करने में लग गया।
विकास की नई योजना वहां लागू की गई। बड़ी बड़ी सड़कों और रेलवे लाइन का जाल बिछा दिया गया। दुनिया भर के निवेशक चीन मे जाकर मैनुफैक्चरिंग प्लांट खोलने लगे। चीन दुनिया का बड़ा निर्यातक देश बन गया। चीन की अर्थव्यवस्था 14 ट्रिलियन डालर की हो गई, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था मात्र 2.75 ट्रिलियन डालर तक पहुंची।
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