कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ को छोड़कर दोनों राज्यों में कलेजे की फांस की तरह नतीजे आए हैं।
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कांग्रेस के लिए भी है सबक
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ को छोड़कर दोनों राज्यों में कलेजे की फांस की तरह नतीजे आए हैं। पंद्रह साल में पार्टी ने एक तरह से लड़ना छोड़ दिया था,संगठन बिखर गया था और इन परिणामों ने उसके लिए संजीवनी का काम किया है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में शिखर नेताओं का आपसी घमासान अभी थमा नहीं है। अगर लोकसभा चुनाव से पहले अंदरुनी लड़ाई नहीं थमी तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
कांग्रेस में अगर किसी की जीत कहा जाए तो वह राहुल गांधी की है। पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद वे इस लिटमस टेस्ट में खरे उतरे हैं। उनकी यह सफलता लोकसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने में मददगार होगी, जो दल उन्हें प्रधानमंत्री के लिए संभावित प्रत्याशी मानने से झिझक रहे थे,अब वे बगलें झांक रहे हैं।
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