आप की जीत से नई राजनीति का उदय हुआ है।
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कांग्रेस के लिए बढ़ती राजनैतिक चुनौतियां
कांग्रेस के पास न मोदी- योगी के मुकाबले कोई प्रभावशाली चेहरा है, न वह अपनी बात जनता को समझा पा रही है। कांग्रेस की एक साॅफ्ट हिंदुत्व की भी छवि रही है जो मोदी के उभार के साथ लगातार कम होती गई और अब तो ऐसा लगता है वह छवि बची भी नहीं।
भाजपा जब से सत्ता में आई है तब से वह कांग्रेस पर हमलावर रही है और एक तरह से यह कहें कि उन्हें हिंदू विरोधी साबित करने में सफल भी रही है। आम आदमी पार्टी का उभार कांग्रेस के लिए एक और बड़ी चुनौती है। अब उसे न सिर्फ भाजपा से लड़ना है बल्कि आम आदमी पार्टी के राजनीतिक रथ को रोकना भी है।
यह सही है कि आम आदमी पार्टी का राजनीति में प्रवेश किसी वैचारिक आंदोलन से नहीं हुआ बल्कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली हुई पार्टी है। भ्रष्टाचार एक मुद्दा है जो तात्कालिक भी हो सकता है और समय के साथ खत्म भी हो सकता है लेकिन राजनीतिक दल दीर्घकालिक विचारों की नींव पर ही टिके होते हैं। आम आदमी पार्टी घोषित रूप से कोई वैचारिक दल नहीं है लेकिन अघोषित रूप से वह लिबरलिज्म को अपनाती जा रही है, जो कि कांग्रेस की वैचारिक जमीन है।
बदल रही है देश की राजनीति
आप कार्यकर्ता जनता के बीच अपने काम और भ्रष्टाचार को लेकर जाते हैं और हर जाति-वर्ग और मजहब के लोगों को अपने साथ जोड़ते हैं। यह आने वाले दिनों में कांग्रेस की रही सही जमीन भी हड़प सकते हैं।
भाजपा के विजय अभियान का कारण सिर्फ और सिर्फ हिंदुत्व नहीं हो सकता। चूँकि वे जनभावनाओं की राजनीति करते हैं इसलिए अपनी बात जनता तक आसानी से पहुंचा सकते हैं और मोदी-योगी तो कुशल वक्ता भी हैं। इसके अलावा गरीबों को फ्री राशन बांटना, किसानों के खाते में हर चार महीने में डायरेक्ट 2000 रूपये ट्रांसपर करना भी बहुत बड़ा कारण है।
इस योजना का सबसे बड़ा जो असर हुआ है वह यह कि लाभार्थी पारंपरिक रूप से भले ही अन्य पार्टियों मसलन सपा, बसपा का वोटर हो लेकिन उसके मन में इस लाभ का गहरा असर है और उसमें से कई भाजपा साइलेंट वोटर बन जाते हैं। विपक्ष के पास फिलहाल इस योजना की काट नहीं है।
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