फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनामिका शुक्ला कांड: इस शिक्षक भर्ती घोटाले को क्या नाम दें ?

विज्ञापन
शिक्षिका से जानकारी लेते विभागीय अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश में संविदा शिक्षक भर्ती के नाम पर जो चौंकाने वाला अनामिका शुक्ला घोटाला सामने आ रहा है, उसने देश में इस तरह के तमाम भर्ती घोटालों को ट्रैश में डाल दिया है। क्योंकि जिस कुटिल बुद्धि, और दुस्साहस के साथ यह सब किया गया, वह अपने आप में अभूतपूर्व है।

विज्ञापन


अब तक मिली जानकारी के मुताबिक अनामिका शुक्ला नाम की एक युवती झूठे दस्तावेजों के आधार पर एक साथ 25 जिलों में बतौर शिक्षिका काम करती रही। इस दौरान एक साल में उसने  करोड़ रुपये वेतन के रूप में डकार लिए और किसी को कानो-कान खबर नहीं लगी। राज्य के शिक्षा विभाग ने जब शिक्षकों का डेटाबेस बनाया तो मामला सामने आया।

प्रदेश में 2010 के बाद नियुक्त होने वाले संविदा शिक्षकों का डाटा बेस इन दिनो खंगाला जा रहा है। सरकार ने इस घोटाले की जांच एसटीएफ से कराने के निर्देश दिए हैं। यह भी सामने आ रहा है कि पकड़ी गई  युवती का असल नाम अनामिका शुक्ला है ही नहीं।
विज्ञापन


प्रदेश के  कासगंज में गिरफ्तासर इस युवती ने बताया कि बीएसस्सी की पढ़ाई के दौरान ही उसे संविदा शिक्षिका की नौकरी दिलवाने का सौदा 1 लाख रुपये में हुआ था। बदले में युवती को 13 माह में 1 करोड़ रुपये दिलवा दिए गए।

यह सब धांधली भर्ती माफिया और विभाग के लोगों की मिली भगत के बगैर हो ही नहीं सकती। इसी संदर्भ में मप्र का उल्लेख भी जरूरी है, क्योंकि यहां भी संविदा शिक्षकों की भर्ती में बड़े घोटाले उजागर हुए हैं। अफसोस इस बात का है बड़ी बेशरमी के साथ किए जाने वाले ये घोटाले उस विभाग से जुड़े हैं,जिस पर समाज को शिक्षित करने का दायित्व  है, जिस पर मनुष्य को गढ़ने और उसे नैतिक बनाने का भार है।

बीती आधी सदी में देश में अगर किसी विभाग की सबसे ज्यादा छीछालेदर हुई है तो उसमें पहला नंबर  शिक्षा विभाग का होगा।  व्यवस्थागत भ्रष्टाचार को अलग रखें तो जो शिक्षक भर्ती ही फर्जीवाड़े से हो रहे हैं, वो बच्चों को क्या और कैसी शिक्षा दे रहे होंगे, यह सोच कर ही सिहरन होती है। उसमें भी यूपी का यह मामला तो भर्ती माफिया की विभागीय भ्रष्टों से मिली भगत के साथ-साथ रहस्य और रोमांच से भी भरा है।

देश में  लाॅकडाउन के इस दौर में कोरोना से मरने और बचने की खबरों से ऊबे लोगों के लिए उत्तर प्रदेश का यह ‘अनामिका शुक्ला घोटाला’ एक अजब तरह का कौतुहल लिए सामने आया।

 

अनामिका शुक्ला: अमेठी, अंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रयागराज, अलीगढ़ और अन्य जिलों में एक शिक्षिका के रूप में पंजीकृत थीं।   - फोटो : अमर उजाला
अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कासगंज कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में अनामिका शुक्ला नामक युवती पूर्णकालिक शिक्षिका के रूप में  विभिन्न जिलों के 25 स्कूलों में नियोजित की गई। हर जगह से उनके खाते में सैलरी भी आ रही थी।

यानी वह अमेठी, अंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रयागराज, अलीगढ़ और अन्य जिलों में एक शिक्षिका के रूप में पंजीकृत थीं।  डिजिटल डेटाबेस के बावजूद कथित अनामिका ने 13 माह की नौकरी में विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये ले लिए।



बताया जाता है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में संविदा शिक्षक नियुक्ति के लिए मूल दस्तावेजों की जांच केवल साक्षात्कार के दौरान ही की जाती है तथा चयन मेरिट के आधार पर होता है। ऐसे में अनामिका के दस्तावेजों में  ग्रेजुएशन को छोड़ हाईस्कूल से इंटर तक 76 फीसद से ज्यादा अंक हैं।

इस कथित अनािमका को यह नौकरी मैनपुरी निवासी किसी राज नाम के व्यक्ति ने 1 लाख रुपये लेकर दिलवाई थी। युवती के बयान के मुताबिक  अनामिका की राज से मुलाकात गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में बीएस्ससी में पढ़ते समय हुई थी।

राज ने अनामिका को अगस्त 2018 में नियुक्ति पत्र भी दिलवा दिया। जांच में अनामिका नाम की कई युवतियां 25 स्कूलों में काम करती पाई गईं, जो दुर्लभतम संयोग ही हो सकता था। मामला पकड़ में आने पर विभाग ने कथित अनामिका को नोटिस दिया तो वह खुद शिक्षा विभाग के दफ्तर इस्तीफा देने जा पहुंची, जहां पुलिस ने उसे घोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस में इसकी रिपोर्ट कासंगज की बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजली अग्रवाल ने दर्ज कराई। अंजलि अग्रवाल के अनुसार  मूल दस्तावेजों में अनामिका शुक्ला की धुंधली फोटो इस फर्जीवाड़े में मददगार बनी।

फोटो धुंधली होने से इंटरव्यू में उसका चयन आधार कार्ड या अन्य दूसरे पहचान-पत्र की बुनियाद पर किया गया। युवती ने इसी तरह बैंक में भी फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपने खाते खुलवाए। पुलिस ने युवती के खिलाफ धारा 420, 467 एवं 468 में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस से पूछताछ में अनामिका का रहस्य इसलिए और गहरा गया कि गिरफ्तार युवती अब अपने अलग-अलग नाम बता रही है। पहले उसने खुद को अनामिका सिंह फिर प्रिया सिंह पुत्री महीपाल सिंह तो बाद में प्रिया जाटव बताया। ऐसे में अनामिका शुक्ला है कौन, इसे पता लगाने में पुलिस जुटी है।

अब सवाल यह है कि अनामिका के नाम से इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव कैसे हुआ ? क्योंकि एक साथ 25 जगह इस तरह एक साथ फर्जी नियुक्ति पाने वाली ठगराज नटवरलाल की दादी ही हो सकती है।

जाहिर है कि सिक्कों की खनक ने एक तो क्या 25 फर्जी अनामिकाएं खड़ी कर दी और किसी को इस पर आपत्ति लेना भी जरूरी महसूस नहीं हुआ। जाहिर है इतना बड़ा फर्जीवाड़ा शिक्षा विभाग के लोगों  की मदद के बगैर संभव ही नहीं है। इस दलाली में सभी के हाथ काले हैं। हालांकि राज्य  सरकार ने अब कथित अनामिका की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए हैं।

मुमकिन है कि जांच के दौरान एक करोड़ी फर्जी वेतन घोटाले में और भी कई चौंकाने वाले  खुलासे हों। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसके पीछे मास्टर माइंड कौन है तथा अब तक ऐसे कितने फर्जी शिक्षक नौकरियां पा गए हैं।

यूपी में 2 हजार शिक्षकों की फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार  पर नियुक्ति की जांच पहले से चल रही है। वहां पिछले साल योगी सरकार  ने 69 हजार सहायक अध्यापको की नियुक्ति की घोषणा  की थी।
विज्ञापन

‘अनामिका शुक्ला घोटाला’ एक अजब तरह का कौतुहल लिए सामने आया। - फोटो : अमर उजाला
अब बात मप्र की। यहां हालांकि अभी ऐसी कोई ‘अनामिका शुक्ला’ सामने नहीं आई है, लेकिन संविदा शिक्षकों तथा अध्यापकों की नियुक्तियों में गड़बडि़यां मप्र में भी हुई हैं।

बुरहानपुर में ऐसे ही एक फर्जीवाड़े में पुलिस ने एक बाबू को गिरफ्तार किया था। भिंड जिले में फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्तियां पाने वाले 49 शिक्षकों की नौकरियां पिछले साल खत्म की जा चुकी हैं। शिक्षा की जरूरतें पूरी करने तथा कम पैसे में शिक्षक भर्ती करने के लिए तरह तरह के पदनामों से भर्तियां की जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता कम ही होती है।

भयंकर बेरोजगारी के कारण लोग शिक्षक की नौकरी पकड़ने पैसा देने को तैयार रहते हैं। इससे बिचौलियों के ‘अच्छे दिन’ जरूर आ जाते हैं। फिर भी अनामिका शुक्ला मामले में भ्रष्टाचार और दुस्साहस  की जो लंबी छलांग दिखती है, उसने ‘अरेबियन नाइट्स’ की कथाओं के ‘रोमांच’ को भी फीका कर दिया है। इस मामले में अभी और पर्तें खुलती जाएंगी तथा और कई चेहरे बेनकाब होंगे।

यूपी सहित अनेक राज्यों में शिक्षकों की भर्ती में जो घोटाले हुए या हो रहे हैं, उनके लिए अलग से जांच एजेंसी बनाकर जांच हो भी कम है। शिक्षा कारोबार तो पहले ही बन चुकी थी, अब व्यापक फर्जीवाड़े में भी तब्दील हो गई है। फिलहाल समझ नहीं आ रहा  कि इस विरल ‘अनामिका शुक्ला घोटाले’ को क्या नाम दें?  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें