अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कासगंज कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) में अनामिका शुक्ला नामक युवती पूर्णकालिक शिक्षिका के रूप में विभिन्न जिलों के 25 स्कूलों में नियोजित की गई। हर जगह से उनके खाते में सैलरी भी आ रही थी।
यानी वह अमेठी, अंबेडकरनगर, रायबरेली, प्रयागराज, अलीगढ़ और अन्य जिलों में एक शिक्षिका के रूप में पंजीकृत थीं। डिजिटल डेटाबेस के बावजूद कथित अनामिका ने 13 माह की नौकरी में विभाग से लगभग 1 करोड़ रुपये ले लिए।
बताया जाता है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में संविदा शिक्षक नियुक्ति के लिए मूल दस्तावेजों की जांच केवल साक्षात्कार के दौरान ही की जाती है तथा चयन मेरिट के आधार पर होता है। ऐसे में अनामिका के दस्तावेजों में ग्रेजुएशन को छोड़ हाईस्कूल से इंटर तक 76 फीसद से ज्यादा अंक हैं।
इस कथित अनािमका को यह नौकरी मैनपुरी निवासी किसी राज नाम के व्यक्ति ने 1 लाख रुपये लेकर दिलवाई थी। युवती के बयान के मुताबिक अनामिका की राज से मुलाकात गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में बीएस्ससी में पढ़ते समय हुई थी।
राज ने अनामिका को अगस्त 2018 में नियुक्ति पत्र भी दिलवा दिया। जांच में अनामिका नाम की कई युवतियां 25 स्कूलों में काम करती पाई गईं, जो दुर्लभतम संयोग ही हो सकता था। मामला पकड़ में आने पर विभाग ने कथित अनामिका को नोटिस दिया तो वह खुद शिक्षा विभाग के दफ्तर इस्तीफा देने जा पहुंची, जहां पुलिस ने उसे घोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस में इसकी रिपोर्ट कासंगज की बेसिक शिक्षा अधिकारी अंजली अग्रवाल ने दर्ज कराई। अंजलि अग्रवाल के अनुसार मूल दस्तावेजों में अनामिका शुक्ला की धुंधली फोटो इस फर्जीवाड़े में मददगार बनी।
फोटो धुंधली होने से इंटरव्यू में उसका चयन आधार कार्ड या अन्य दूसरे पहचान-पत्र की बुनियाद पर किया गया। युवती ने इसी तरह बैंक में भी फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपने खाते खुलवाए। पुलिस ने युवती के खिलाफ धारा 420, 467 एवं 468 में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस से पूछताछ में अनामिका का रहस्य इसलिए और गहरा गया कि गिरफ्तार युवती अब अपने अलग-अलग नाम बता रही है। पहले उसने खुद को अनामिका सिंह फिर प्रिया सिंह पुत्री महीपाल सिंह तो बाद में प्रिया जाटव बताया। ऐसे में अनामिका शुक्ला है कौन, इसे पता लगाने में पुलिस जुटी है।
अब सवाल यह है कि अनामिका के नाम से इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव कैसे हुआ ? क्योंकि एक साथ 25 जगह इस तरह एक साथ फर्जी नियुक्ति पाने वाली ठगराज नटवरलाल की दादी ही हो सकती है।
जाहिर है कि सिक्कों की खनक ने एक तो क्या 25 फर्जी अनामिकाएं खड़ी कर दी और किसी को इस पर आपत्ति लेना भी जरूरी महसूस नहीं हुआ। जाहिर है इतना बड़ा फर्जीवाड़ा शिक्षा विभाग के लोगों की मदद के बगैर संभव ही नहीं है। इस दलाली में सभी के हाथ काले हैं। हालांकि राज्य सरकार ने अब कथित अनामिका की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए हैं।
मुमकिन है कि जांच के दौरान एक करोड़ी फर्जी वेतन घोटाले में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हों। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसके पीछे मास्टर माइंड कौन है तथा अब तक ऐसे कितने फर्जी शिक्षक नौकरियां पा गए हैं।
यूपी में 2 हजार शिक्षकों की फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति की जांच पहले से चल रही है। वहां पिछले साल योगी सरकार ने 69 हजार सहायक अध्यापको की नियुक्ति की घोषणा की थी।