सबसे महत्वपूर्ण खोज यह थी कि छात्र जब घर जाते हैं तो अपने दोस्तों और परिवार को स्कूल में सीखी गई बातों को सिखाते हैं।
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ऐसे चुने जाते हैं विद्यार्थी-
नामित जिले के जेएनवी में कम से कम 75% सीटें ग्रामीण क्षेत्रों से चुने गए उम्मीदवारों द्वारा भरी जाती हैं और शेष सीटें जिले के शहरी क्षेत्रों से भरी जाती हैं। इन विद्यालयों में जातिगत आरक्षण नीति का पालन किया जाता है। दिव्यांग बच्चों के लिए आरक्षण का प्रावधान है और कुल सीटों में से कम से कम एक तिहाई सीटें लड़कियों द्वारा भरी जाती हैं।
मैंने बोकारो और धनबाद जिलों के जेएनवी स्कूल का दौरा छात्रों, उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं उन्हें दी जा रही शिक्षा को समझने और यहां के छात्र अपने जीवन में क्या बदलाव ला पाते हैं और जेएनवी के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव की गहरी समझ हासिल करने के लिए किया। एक प्रश्नावली वाले सर्वेक्षण की मदद से पंद्रह छात्रों, तीन शिक्षकों और प्रत्येक स्कूल के प्रिंसिपल का साक्षात्कार लिया गया।
आठवीं, नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के पांच ऐसे छात्रों जिन्होंने स्कूल में कम से कम दो साल बिताए हों, का साक्षात्कार लिया ताकि एक अलग नमूना सेट किया जा सके। सर्वेक्षण प्रश्नावली के डेटा से पता चला कि 30% छात्र पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी थे, 18% के पास अभी भी अपने घरों में शौचालय, नहाने की सुविधा और टैप वाटर की सुविधा नहीं थी, 30% के पास घर में नहाने की सुविधा नहीं थी, 30% के पास टैप वाटर नहीं था और 50% से अधिक लोगों के पास शुद्ध पेयजल की सुविधा नहीं थी।
बातचीत, साक्षात्कार और स्कूल में 2 दिन बिताने के बाद छात्रों के बारे में मेरा अवलोकन इस प्रकार था:-
1. छात्र एक दूसरे का, शिक्षकों का और अपनों से बड़ों का सम्मान करते हैं। वे हिंदी और ठीक-ठाक अंग्रेजी और बांग्ला में बातचीत करने में निपुण थे। वे आसानी से प्रश्नों को समझ रहे थे और खुद से उनके उत्तर तैयार करते थे। मैं यह देखकर अभीभूत था कि इनमें से अधिकांश छात्र अपने घरों में आदिवासी/क्षेत्रीय भाषाएं बोलते थे। छात्रों में उत्साह साफ नजर आ रहा था।
2. छात्र जेएनवी में आने को एक "सुनहरा अवसर" या "जीवन में एक बार मिलने वाला अनुभव" मानते हैं और वे स्कूल में कराई जाने वाली लगभग सभी गतिविधियों जैसे- कला, नृत्य, संगीत, योग, शारीरिक प्रशिक्षण और सार्वजनिक मंच पर बोलना आदि में भाग लेकर इसका सर्वोत्तम उपयोग करने का प्रयास करते हैं।
3. छात्र जाति, रंग, धर्म या लिंग की परवाह किए बिना एक-दूसरे के साथ खेल रहे थे और गतिविधियों में एक साथ भाग ले रहे थे। इसकी पुष्टि इस तथ्य से की जा सकती है कि जब वे साक्षात्कार के लिए आए, तो वे खेल के मैदान या भोजन कक्ष में थे, चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो लेकिन उनकी मित्रता हर जगह साफ़ नजर आ रही थी।सामाजिक राजनीति से दूर रहने पर, बच्चे विशेष रूप से आपस में कोई भेदभाव नहीं करते हैं।
4. कक्षाओं में छात्रों के लिए स्मार्ट बोर्ड और लैपटॉप और प्रोजेक्टर थे। उनके पास स्कूल में माइक्रोस्कोप और प्रयोगशाला उपकरण से लैस उच्च विद्यालय स्तर की प्रयोगशालाएं भी थीं। यहां एक शानदार पुस्तकालय था और वे हर दिन कम से कम डेढ़ घंटे एक साथ खेलते थे और इनके अध्ययन के घंटे निर्धारित थे। जेएनवी में छात्रों के पास सर्वोत्तम सुविधाएं हैं और वे अधिकतम उत्पादकता के लिए प्रेरित रहते हैं।
5. छात्र और शिक्षक के बीच मजबूत रिश्ता है और वे खुद को आपस में एक परिवार मानते हैं। उनका रिश्ता सिर्फ़ कक्षाओं तक ही सीमित नहीं है। शिक्षक, एक शिक्षक और मार्गदर्शक का कार्य करते हैं इसलिए छात्रों के लिए कक्षा के अंदर और बाहर अपने संदेह पूछने या स्पष्टीकरण मांगने के लिए शिक्षक से संपर्क करना आसान होता है।
6. छात्रों ने जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, कचरे के सुरक्षित निपटान, पानी की कमी और ग्लोबल वार्मिंग जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। ये छात्र स्थानीय संदर्भ के साथ-साथ वैश्विक संदर्भ दोनों में नतीजों से अवगत थे। वे इन मुद्दों से निपटने के लिए अपना अधिकतम प्रयास करने की कोशिश करते हैं। स्कूल में डिस्पोजेबल प्लास्टिक की वस्तुओं का लगभग कोई उपयोग नहीं होता है और वे घर पर भी ऐसा ही करने की कोशिश करते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है-
मेरी सबसे महत्वपूर्ण खोज यह थी कि छात्र जब घर जाते हैं तो अपने दोस्तों और परिवार को स्कूल में सीखी गई बातों को सिखाते हैं। वे शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक दोनों तरह के अपने अनुभव और सीख को दूसरों के साथ साझा करते हैं। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की कि कोई एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न हो, कोई रासायनिक रिसाव या अपवाह जल निकायों में न बहे, एक आत्मविश्वास से भरी लड़की ने पास की एक नदी में अपशिष्ट जल के रिसाव की ओर इशारा करते हुए एक उदाहरण दिया और उसने अधिकारियों को इसके बारे में सूचित किया, जिस पर कार्रवाई की गई और रिसाव बंद हो गया।
एक और काम जो एक छात्र ने किया वह था परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को पास के खुले सीवेज को ढकने के लिए मनाना। एक बहुत ही सहज तरीके से, जिसमें कुछ छात्रों ने अपने स्थानीय समुदाय के सदस्यों को जलवायु परिवर्तन के बारे में समझाया, उनसे बारिश के अलग-अलग पैटर्न और सर्दी और गर्मी की अवधि और कुल मिलाकर तापमान में बदलाव के बारे में बात की।
यह ज्यादातर अशिक्षित और ग्रामीण समुदाय के लिए इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारी को संप्रेषित करने का एक बहुत ही विश्वसनीय और प्रभावी तरीका निकला। कई छात्र अब अपने पीने के पानी को घर पर ही छानते हैं या पीने से पहले उबालते हैं। वे अपने समुदाय के सदस्यों को इसके बारे में जागरूक भी करते हैं।
कई छात्रों ने कहा कि जब वे घर जाते हैं तो वे अपने छोटे भाई-बहनों और दोस्तों और कुछ अपने माता-पिता को भी पढ़ाते हैं। छात्रों ने यह भी कहा कि वे अपने परिवार को स्वस्थ और संपूर्ण आहार के महत्व और व्यक्तियों की भलाई पर इसके प्रभाव के बारे में शिक्षित करते हैं। उन्होंने कोविड 19 महामारी के दौरान सामाजिक दूरी के महत्व और टीका लेने के महत्व के बारे में बताने वाले समुदाय के साथ भी काम किया। जेएनवी के छात्र अपने सामुदायिक क्षेत्र के इच्छुक उम्मीदवारों का मार्गदर्शन भी करते हैं।
शिक्षकों ने फीडबैक दिया कि जेएनवी में आने के बाद से कई छात्र अधिक परिपक्व हो गए हैं और सामाजिक व्यवहार के शिष्टाचार और बारीकियों को सीखते हैं, समय के पाबंद और स्वतंत्र बनते हैं और बेहतर व्यक्ति बनते हैं। शिक्षकों ने कहा कि जेएनवी बच्चों के लिए एक अच्छा स्कूल है क्योंकि उन्हें बहुत अधिक एक्सपोजर मिलता है।जेएनवी छात्रों के लिए बहुत सारी शैक्षणिक सहायता प्रदान करते हैं और छात्रों के पास अपनी इच्छा की परीक्षाओं के लिए कोचिंग संस्थान जैसे आकाश और दक्षिणा फाउंडेशन जैसे विभिन्न संगठनों द्वारा निःशुल्क प्रदान की जाने वाली कोचिंग में भी जाने का मौका मिलता है।
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