पिछले एक साल में सरकार चलाने का तरीका लगभग वही है, जो पहले दो कार्यकाल में था।
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अतीत और बदलती राजनीति
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार आने से पहले मुझे याद है, जब भी मैं सड़क मार्ग से एक से दूसरे शहर की यात्रा करता था, एक सिंगल रोड हुआ करती थी। यात्रा बड़ी कष्टदायक और जोखिम भरी होती थी। भले टोल टैक्स नहीं था, लेकिन यह सफर मुश्किल होता था। वाजपेयी सरकार ने देश में कुछ हाईवे बनाने की शुरुआत की, जिन में दिल्ली-आगरा, दिल्ली-जयपुर जैसे हाईवे शामिल हैं, लेकिन वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में सड़कों की सूरत बदली है। अच्छी सड़कों ने न्यू इंडिया में गेमचेंजर का काम किया है। भले हमारी जेब से टोल टैक्स लिया जा रहा है, लेकिन आज कनेक्टिविटी के मामले में भारत विकसित देशों से पीछे नहीं है। देश में एक्सप्रेस-वे और हाई-वे का जाल बिछा हुआ है। अच्छी सड़कों का लाभ खास के साथ आम भारतीय को भी हुआ है।
हालांकि, कुछ विफलताएं भी मोदी सरकार के साथ जुड़ी हुई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से बेरोजगारी प्रमुख है। बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर रहती है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2024 के बीच शहरी युवा बेरोजगारी दर 15 से 23% तक पहुंची।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी के वास्तविक आंकड़े जारी नहीं कर रही है। एक बड़ा मुद्दा आज भी वर्ष 2016 में की गई
नोटबंदी का है। उस समय सरकार ने यह कहते हुए नोटबंदी की गई थी कि काले धन पर प्रहार किया जा रहा है। नकली नोटों को रोकना है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है। डिजिटल भुगतान तो बढ़ा, लेकिन आज भी बड़ी मात्रा में कालाधन और नकली नोटों का मिलना जारी है।
राजनीतिक मोर्चे की बात करें तो नरेंद्र मोदी ने अपने पहले दो कार्यकाल पूर्ण बहुमत की सरकार के रूप में सफलतापूर्वक चलाए। तीसरे कार्यकाल में वो अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। वैसे, पिछले एक साल में सरकार चलाने का तरीका लगभग वही है, जो पहले दो कार्यकाल में था। सरकार के दो प्रमुख सहयोगी दल जनता दल (यू) और तेलुगू देशम पार्टी सरकार को पूरा सहयोग दे रहे हैं।
बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के बाद क्या समीकरण बनते हैं, यह देखना होगा। तेलुगू देशम पार्टी भी सरकार के पक्ष में दिखती है, लेकिन क्या वह आगे चार साल सरकार को यूं ही सहयोग देती रहेगी, यह बड़ा प्रश्न है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे सुखद बात यह है कि विपक्ष की भूमिका बेहद निराशाजनक है। विपक्ष मूल मुद्दों पर सरकार को घेरने के बजाय नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलता है, जिसका लाभ नरेंद्र मोदी को ही हो रहा है।
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