जिला महिला अस्पताल की व्यवस्था बदहाल है। रविवार को अस्पताल की स्थिति कुछ यूं रही मानो पूरा स्टाफ ही छुट्टी पर हो। पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के ठीक सामने गंदगी इकट्ठा था और इमरजेंसी वार्ड में कुत्ता आराम फरमा रहा था। इमरजेंसी वार्ड के ठीक पीछे भी कचरा इकट्ठा था। अस्पताल में कुल मिलाकर जच्चा-बच्चा की जान से खिलवाड़ हो रहा है।
महिला अस्पताल की खामियों की तस्वीर कई बार सामने आ चुकी है। रविवार को ‘अमर उजाला’ ने जब अस्पताल की हकीकत जानीं तो फिर सूरत-ए-बदहाल उजागर हुई। अमर उजाला संवाददाता दोपहर करीब 2:55 पर अस्पताल पहुंचा, उस वक्ता पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड, इमरजेंसी में डॉक्टर तो दूर स्टाफ कर्मी भी नहीं मौजूद था। ऑपरेशन के बाद जिस पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में जच्चा-बच्चा को देखरेख के लिए रखा जाता है, उसके बाहर दो दिन से गंदगी जमा थी। तीमारदार मो. जावेद ने बताया कि शनिवार को उसकी पत्नी व बच्चे को इस वार्ड में रखा गया था। तब से गंदगी को किसी ने नहीं उठाया है। कूड़ेदान की भी दो दिन से सफाई नहीं हुई है। जहां गंदगी पड़ी थी, उससे तीन-चार मीटर की दूरी पर कुत्ता सो रहा था।
फैल सकता है इंफेक्शन
अस्पताल का जो भी कचरा होना चाहिए, उसे बायो मेडिकल वेस्ट के अंतर्गत अलग-अलग कूड़ेदान में रखना चाहिए। इसके अलावा जो भी गंदगी होती है, यदि वह अस्पताल में इकट्ठा होती है, तो उसमें मच्छर-मक्खी आकर बैठने लगते हैं। इससे जब मच्छर, मक्खी जच्चा-बच्चा के शरीर के संपर्क में आते हैं, तो इंफेक्शन फैल सकता है। इसलिए वार्ड और उसके आसपास कहीं पर भी कूड़े का ढेर नहीं होना चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
करवाई जाएगी सफाई
अभी निर्माण कार्य चल रहा है। नई बिल्डिंग में लेबर रूम शिफ्ट कर रहे हैं। बेड दोगुने हो जाने के कारण स्टाफ की भी कमी है। ऐसे में अभी कुछ अव्यवस्था मिल सकती है लेकिन सोमवार से ही सफाई करवाई जाएगी। - डॉ. पीके खत्री, सीएमएस, महिला अस्पताल