देश विदेश में मशहूर महोबा का देशावरी पान पाले की मार से दागदार हो गया है। पान की उपयोगिता कम हुई है। पान की पैदावार ले रहे किसान फसल बचाने को दवाओं का छिड़काव कर रहे है। दो दशक पहले महोबा व आस पास के क्षेत्र में लगभग 600 एकड़ में पान की फसल की पैदावार होती थी। जो अब घटकर 60 एकड़ में बची है।
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पाले से सैकड़ों पान कृषकों का परिवार प्रभावित
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औषधीय गुणों से भरपूर देशावरी पान का मजा अब इसके शौकीन नहीं ले सकेंगे। कोहरा व ठंड से पान दागदार हो गया है। बेहद करारेपन का अहसास कराने वाला यह पान दिल्ली, आगरा, मथुरा, मुरादाबाद व मध्यप्रदेश के अलावा पाकिस्तान और श्रीलंका में भी भेजा जाता था। लेकिन प्रकृति की मार के चलते इसका उत्पादन कम होने से निर्यात कम हो गया है।
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अमेरिका, लंदन तक जाता है करारा पान
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जिले के देशावरी पान की खपत रामपुर, पीलीभीत, बरेली, सहारनपुर, दिल्ली, मेरठ, अलीगढ़, आगरा, शामिली, बागपत सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा लंदन, अमेरिका, कनाडा, पाकिस्तान, यूरोप, श्रीलंका, नेपाल आदि देशों में यहां का पान बेहद करारेपन के लिए पंसद किया जाता है। पान को मुंह रखते ही यह पान पूरी तरह से घुल जाता है।
तीन दशक पहले ट्रेनों से भेजा जाता था पान
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तीन दशक पहले रेलवे स्टेशन महोबा से ट्रेन में पान लोड होकर लखनऊ और दिल्ली पहुंचता था। एक दिन में 18 से 20 क्विंटल पान देश विदेश में भेजा जाता था। रेलवे स्टेशन में 300 से ज्यादा टोकरे प्रतिदिन ट्रेनों में लोड किए जाते थे। दिल्ली में टोकरे से पान निकालने के बाद बेहतर पैकिंग करके विदेशों में भेजा जाता था। लेकिन अब हफ्ते में बमुश्किल 50-60 टोकरे ही भेजे जाते हैं।
पान अनुसंधान केंद्र महोबा के पूर्व वैज्ञानिक डा. रामसेवक चौरसिया कोहरे से पान की फसल बचाने के लिए बरेजों में हल्का धुआं करें एवं पान की फसल में हल्की सिंचाई करें। पान बरेजे के ऊपर हल्की घास लगा दे। जिससे पान की फसल पर ज्यादा असर न हो सके। शीत लहर रोकने को बरेजे के अंदर चारों तरफ पुरानी साड़ियां लगाए। इससे पान की फसल में डायरेक्ट तेज हवा नहीं लग सकेगी।