जंगल से लगभग 30 किलो मीटर दूर तहसील अमरिया क्षेत्र में बाघों की चहलकदमी थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार भोर में क्षेत्र के उड़रा गांव की आबादी में बाघ की दस्तक से दहशत फैल गई। यहां एक घर के भीतर बाघ घुस आया और वहां पशुशाला में बंधी गाय को खींच ले जाकर अपना निवाला बना लिया। सुबह घटना की सूचना पर वन विभाग की निगरानी टीम मौके पर पहुंची। टीम घसीटने के निशान के सहारे जब कुछ दूर झाड़ियों से होते हुए नदी किनारे पहुंची तो थोड़ी दूर पर बाघ गाय को खाता मिला। यह देख टीम के होश उड़ गए। टीम ने बाघ की निगरानी के लिए दो कैमरे लगा दिए हैं। ग्रामीणों को भी अलर्ट कर दिया है।
तीन दिन पूर्व कटमटा गांव में निर्मल सिंह के पालतू कुत्ते को बाघ निवाला बना चुका है। बाघ की आमद के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। गांव उड़रा निवासी लखविंद्र सिंह ने बताया कि उनके मकान के बराबर में डेयरी फार्म बना है। जिसमें मवेशीयों को बांधा जाता है और वाहन खड़े रहते हैं। फार्म के अंदर नौकर भगवान दास सोता है। गुरुवार की रात भी भगवान दास डेरी फार्म के अंदर ही सोया था। शुक्रवार सुबह लगभग पांच बजे बाघ डेरी फार्म में घुस आया और पशुशाला के अंदर बंधी गाय को खींचकर कैलाश नदी किनारे ले गया। सुबह उठने पर भगवानदास ने पशुशाला में देखा तो गाय नहीं थी और उसके घसीटने के निशान व खून के धब्बे जमीन पर थे। बाघ के पगमार्क भी बने थे। यह देख उसे घटना समझते देर नहीं लगी। घटना की खबर सुनकर तमाम ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। घटना की सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना पर पहुंचे वन दरोगा अवनेश गंगवार, चेतन कुमार, तेजपाल, डब्लूडब्लूएफ के प्रेमचंद मौर्या मौके पर पहुंचे। घिसटन के निशान के सहारे बाघ के पगमार्क देखते हुए वह लोग जब नदी किनारे तक पहुंचे तो देखा वहां बाघ गाय को बैठा खा रहा था। यह देख उनके होश उड़ गए। वन विभाग की पूरी टीम नदी किनारे झाड़ियों से बाहर आ गई। इसके बाद टीम ने बाघ की निगरानी के लिए दो कैमरे लगा दिए। आस-पास में रहने वाले किसानों एवं ग्रामीणों को अलर्ट किया व खेतों पर अकेले न जाने की सलाह दी। लखविंदर सिंह ने बताया कि डेयरी फार्म पर रहने वाला भगवान दास बाघ की दहशत के चलते काम छोड़ कर चला गया है।