इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुरादाबाद में नाबालिग छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने और उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने के मामले में आरोपी छात्रा की अग्रिम जमानत अर्जी सशर्त मंजूर कर ली। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने दिया है।
मुरादाबाद के बिलारी थाने में 22 जनवरी 2026 को पीड़ित नाबालिग लड़की के भाई ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि स्कूल की छात्राओं ने उसकी बहन का धर्म परिवर्तन कराने के इरादे से ब्रेनवॉश किया। पीड़िता को जबरन बुर्का पहनाया गया। उस पर लगातार मजहब बदलने का दबाव बनाया गया। पुलिस ने इस मामले में उप्र गैर-कानूनी धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। आरोपी छात्रा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत अर्जी दायर की थी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी छात्रा को दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया गया है। याची और पीड़िता इंटर कॉलेज में साथ पढ़ती थीं। प्राथमिकी काफी देरी से लिखी गई। मुख्य आरोपी छात्रा को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस पर अपर शासकीय अधिवक्ता ने अर्जी का विरोध किया।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद माना कि पीड़िता के बयानों के अलावा रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य पुख्ता दस्तावेज नहीं है जो आरोपी छात्रा की इस अपराध में संलिप्तता को साबित करता हो। याची के भागने का कोई खतरा नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया कि याची 30 दिनों के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट या जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करे। 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतदारों की शर्तों पर अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।