श्रीनगर में बैकुंठ नाटय महोत्सव में नाटक कंजूस मिया दीवाने का मंचन करते कलाकार
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‘कंजूस मियां दीवाने’ ने बृहस्पतिवार को दर्शकों को हंसी से लोट पोट किया। दिल्ली की प्रसिद्ध नाट्य संस्था बेला थिएटर की ओर से प्रस्तुत किए गए हास्य नाट्य की सटीक पटकथा और चुटीले संवादों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
बुधवार को बैकुंठ नाट्य महोत्सव की तीसरी संध्या का शुभारंभ बाल संरक्षण आयोग के उपाध्यक्ष योगेन्द्र खंडूडी ने किया। इसके बाद राजकीय पालीटेक्निक आडिटोरियम में मोलियर के मशहूर नाटक द माईसर के हिंदी रूपांतर ‘कंजूस मियां दीवाने’ का मंचन किया गया। कंजूस मियां दीवाने नाटक में बाप की कंजूसी को दिखाया गया है। कहानी में बाप (र्मिजा सखावत) बेटे (फारूख) को एक ही लड़की मरीयम से मोहब्बत हो जाती है।
जब यह राज खुल जाता है तो कहानी नया मोड़ ले लेती है। अंत में बेटा (फारूख) मरीयम (प्रेमिका) को पा लेता है। नाटक की पूरा कथानक चुटीले संवादों से भरा है। जो दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहा। नाटक की कहानी बाप बेटे के आस-पास ही घूमती है। समाज में घट रही घटनाओं को इस नाटक में चुटीले संवादों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
आज का नाटक
शुक्रवार को गढ़वाली हास्य नाटक खाडू लापता का मंचन टीम जश्न-ए-विरासत द्वारा किया जायेगा। ललित मोहन थपलियाल की कहानी पर आधारित नाटक का निर्देशन परवेज अहमद ने किया है।