इस देश में ढोंगी बाबा आखिर क्यों नहीं फलेंगे फूलेंगे। यहां तो राजनेता और राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस तक में अंधविश्वास फैलाने वाले बयान और सूचनाएं दी जाती हैं। कोई पुष्पक विमान के होने का दावा करता है तो कोई धार्मिक ग्रंथों से पूरी दुनिया को विज्ञान मिलने का बयान देता है।
एक बाबा तो आजकल योग से सभी बीमारियों के ठीक होने का दावा करते हैं। इसके उलट जब चार दिन व्रत में बीमार पड़ गए तो मेदांता जैसे हॉस्पिटल में इलाज कराने के लिए भर्ती हुए। भगवान बनकर अंधविश्वास फैला रही ताकतों के खिलाफ लड़ रहे प्रसिद्ध तर्कवादी और वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. नरेंद्र नायक बुधवार को लखनऊ में थे।
वह डायट में जिला विज्ञान क्लब की तरफ से आयोजित अंधविश्वास की वैज्ञानिक व्याख्या पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता थे। मूलरूप से मंगलौर निवासी प्रो. नायक ने बताया कि योग या वैदिक विज्ञान के नाम पर सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। इसकी कोई वैज्ञानिक सत्यता नहीं है।
योग से बीमारियां ठीक होने के जो रिसर्च पेपर छपने का दावा किया जाता है। असल में यह रिसर्च पांच-छह लोगों पर किए जाते हैं। इनकी
प्रो. नायक का कहना था कि आजकल आंख बंद कर पढ़ना और रंग बता देने की दैवीय शक्ति जैसे नाटक खूब किए जा रहे हैं। पिछले दिनों मेरठ में भी ऐसी एक लड़की सामने आई। यह सूंघकर और छूकर पढ़ और रंग बता सकती थी।
95 प्रतिशत मामलों में सांप के काटने पर खतरा नहीं
अंधविश्वास
- फोटो : amar ujala
इसके झूठ को भी मैंने लोगों के सामने ला दिया। पूरी मीडिया ने इस झूठ को सच की तरह दिखाया। यह बंद होना चाहिए। इसे मिड ब्रेन एक्टीवेशन तकनीक का नाम दिया गया है। यह सिर्फ एक धोखा है। इस धोखे के लिए इससे जुड़े लोग 10-50 रुपये प्रशिक्षण के नाम पर चार्ज करते हैं।
पूरी किट इसमें दी जाती है, जिसमें सीडी, किताब, बैग सब कुछ शामिल होता है। असल में आंख के निचले हिस्से से सब कुछ दिखाई देता है। ऐसे बच्चों के झूठ मैंने पकड़े। अब तो कुछ गॉडमैन भी ऐसा करने लगे हैं। मैं इनसे कहता हूं कि मेरी चुनौती स्वीकारो। आंखों पर पहनने वाला मास्क सिर्फ मेरा होगा।
हमारे देश में सांप काटे का इलाज करने के लिए सैकड़ों गॉडमैन हैं। यह सांप के काटने पर इंसान को जड़ी-बूटी और झाड़फूंक से बचाने का दावा करते हैं। हकीकत यह है कि 95 प्रतिशत मामलों में सांप काटने से कोई खतरा नहीं होता है। इसी को दिखाकर इनकी विद्या की सफलता के रूप में झूठा प्रचार किया जाता है। असल में यह लोग बाकी पांच प्रतिशत को बचा भी नहीं सकते हैं।
यही पीलिया के मामले में होता है। 15 दिन में पीलिया लोगों को पता चलता है। शरीर में तब तक एंटीबॉडीज बनने लगते हैं। डॉक्टर की जांच में पता चलने पर वह आराम करने और लिक्विड डायट पर रहने की सलाह देता है।
मिडिल क्लास भी बन रहा है ढोंगी
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ऐसे में कुछ जानकार लोग गॉडमैन बाबा के पास जाने की सलाह दे डालते हैं। असल में बाबा का काम जब तक शुरू होता है, एंटीबॉडीज पीलिया को ठीक कर चुके होते हैं। इसे बाबा की कृपा बताया जाता है।
प्रो. नायक ने बताया कि चुनावों में अचानक से भविष्यवाणी करने वाले प्रकट हो जाते हैं। मैंने कहा कि मेरी चुनौती स्वीकार करो। मैं 10 लाख रुपये दूंगा अगर सभी सवालों के जवाब सही निकले। कोई भी आगे नहीं आया क्योंकि इससे ऐसे ढोंगियों की हकीकत सामने आ जाती।
प्रो. नायक ने कहा कि हमारा मिडिल क्लास भी अब ढोंगी बन रहा है। हम एक तरफ काला धन पर गालियां देते हैं। वहीं अपनी जमीन या फ्लैट बेचने के समय काले धन से ही भुगतान ले लिया जाता है। आरटीओ में अपना काम जल्दी कराने के लिए खुद ही रिश्वत देते हैं।