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संध्योपासना से मजबूत होती है परिवार व्यवस्था : आचार्य शतक्रतु

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झज्जर। आर्य समाज का मासिक वैदिक यज्ञ एवं सत्संग रविवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आचार्य शतक्रतु वाचस्पति ने ‘वैदिक प्राचीन संध्या-उपासना विधि’ विषय पर प्रकाश डाला। आचार्य शतक्रतु ने कहा कि प्राचीन समय में सूर्योदय और सूर्यास्त की संधिवेला में संध्योपासना करना दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इससे व्यक्ति के साथ-साथ परिवार व्यवस्था भी मजबूत और संस्कारित रहती थी। उन्होंने कहा कि वैदिक ज्ञान, विद्या और संस्कारों के कारण भारतवर्ष विश्वगुरु रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अर्थ को अधिक महत्व देने के कारण मनुष्य ने कई आवश्यक नित्यकर्मों को त्याग दिया है, जिसके दुष्परिणाम पारिवारिक एवं सामाजिक व्यवस्था में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने संध्योपासना को आवश्यक नित्यकर्म बताते हुए इसे जीवन में अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान प्रकाशवीर आर्य, नवीन योगाचार्य, सुमित राठी, राजकुमार आर्य डाबला, ओमकुमार धनखड़, दलीप सिंह आर्य, अरविंद दहिया, दीपक आर्य, ओमप्रकाश आर्य मौजूद रहे।
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