राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को शपथ पत्र पेश कर जवाब मांगा है कि वक्फ बोर्ड के निर्वाचित सदस्य के खाली पद पर चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। अदालत ने इसके लिए मुख्य सचिव को 26 मई तक का समय दिया है।
न्यायाधीश आलोक शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सैयद नजीर हसन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। अदालती आदेश की पालना में सोमवार को मुख्य सचिव की ओर से अदालत में शपथ पत्र पेश किया गया जिसे देखने के बाद अदालत ने कहा कि यह आदेश के अनुकूल शपथ पत्र नहीं है। ऐसे में मुख्य सचिव अतिरिक्त शपथ पत्र पेश कर बताएं कि खाली पद पर चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि वक्फ बोर्ड का कामकाज वक्फ अधिनियम के अनुसार संचालित किया जाता है। अधिनियम में कहा गया है बोर्ड में निर्वाचित संस्थाओं से आए सदस्यों की संख्या मनोनीत सदस्यों से अधिक रहेगी। इसके अलावा नए सदस्य की नियुक्ति तक पुराने सदस्य को बैठक में बुलाया जाएगा।
याचिका में कहा गया कि राज्यसभा सांसद अश्क अली टांक का कुछ माह पहले कार्यकाल पूरा हो गया। जिसके चलते वे बोर्ड सदस्य बने रहने के भी अपात्र हो गए। ऐसे में मनोनीत सदस्यों और निर्वाचित सदस्यों की संख्या बराबर हो गई। इसके बावजूद न तो नया सदस्य बनाया गया और न ही बोर्ड की बैठक में अश्क अली को शामिल किया जा रहा जिसके चलते बोर्ड की गत दो बैठकों की कार्रवाई अवैध हो गई हैं। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने मुख्य सचिव को शपथ पत्र पेश कर चुनाव नहीं करने के संबंध में स्पष्टीकरण देने को कहा है।