एससी-एक्ट को संशोधित किए जाने का विरोध करते हुए राजा भइया ने कहा कि जो लोग संसद में कभी भी एक राय नहीं होते थे, वह इस मुद्दे पर एक हो गए। इससे साफ है कि सभी राजनीतिक दल वोट की राजनीति के लिए दलित व गैर दलित को बांटना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दलित विरोधी नहीं है, क्योंकि दलित भी इसी समाज का अंग है।
हत्या, रेप व आपदा के पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने के मामले पर सरकारों पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए राजा भइया ने कहा कि जब संविधान में सभी को समान अधिकार है तो यह सरकारी स्तर पर भेदभाव क्यों किया जा रहा है। ऐसे मामलों के पीड़ित गैर दलितों को भी उतनी ही धनराशि मदद मिलनी चाहिए, जितनी दलित पीड़ितों को दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दलितों का आर्थिक मदद दिए जाने का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि सभी जातियों को बराबर मदद दिए जाने की मांग करते हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ युद्ध या विशेष परिस्थितियों में शहीद होने वाले सैनिको को ही सुविधाएं दी जाती है। जबकि हमारी पार्टी की एजेंडा होगा कि किसी भी परिस्थिति में शहीद होने वाले सैनिक व अर्धसैनिक बलों को भी कम से कम एक करोड़ रुपये की सहायता दी जाए।
आईएएस व आईपीएस के बच्चों न मिले आरक्षण का लाभ
आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए राजा ने कहा कि इस व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। जिसके लिए बाबा साहेब ने संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की थी, उन लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा भी समाज के कई वर्ग के लोग पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ ले चुके आइएएस-आइपीएस अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर करके गरीबों को लाभ देना चाहिए।
राजधानी के सबसे बड़े मैदान में उमड़ी भीड़ से गदगद राजा ने कहा कि वह दिन अब दूर नहीं, जब कुंडा वाले राजनीतिक दलों के कुंडली लिखेंगे। खुद को जातिगत राजनीति रहने की वकालत करते हुए राजा ने कहा कि कुंडा विस क्षेत्र में 4 लाख मतदाता हैं, जिसमें से क्षत्रियों की संख्या मात्र 12 हजार है, लेकिन हर साल उनकी जीत का अंतर बढ़ता ही जाता है।
उम्मीद से अधिक उमड़ी भीड़
राजा भइया को भी उम्मीद नहीं थी कि रमाबाई मैदान में इतनी भीड़ जुटेगी। अपने संबोधन में उन्होंने यह बताया भी। मैदान की सीढियों को छोड़ बाकी सारा मैदान खचाखच भरा हुआ था। मैदान के बाहर भी वाहनों की रेला था। शहीद पथ पर भी दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार थी। यह कतार रमाबाई लेकर रायबरेली रोड कर लगी थी। लोग पैदल ही उतर कर मैदान में जा रहे थे। लोगों का आकलन था कि 90 हजार से एक लाख तक भीड़ थी।