जगदलपुर में सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी सेवाओं के निजीकरण के विरोध में एमएलटी प्रकोष्ठ, छग प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ बस्तर जिला की बैठक हुई। जिला संयोजक अरुण कुमार पाणिग्रही की अध्यक्षता में मंडी प्रांगण जगदलपुर में यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें बस्तर जिले के एमएलटी साथियों और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय डिमरापाल के कर्मचारियों ने भाग लिया।
वक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं है जिसे ठेके पर दिया जाए। सरकार का यह निर्णय आम जनता और 6000 से अधिक प्रशिक्षित एमएलटी कर्मचारियों के भविष्य पर कुठाराघात है। बैठक में एचएलएल जैसी निजी एजेंसी को सरकारी लैब का ठेका दिए जाने का कड़ा विरोध किया गया। इसे जनविरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की गई।
आगामी 12 जुलाई को रायपुर में होने वाली प्रांतीय बैठक में बस्तर जिले से अधिकतम एमएलटी शामिल होंगे। वहीं से आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी। निजीकरण के दूरगामी परिणामों से जनता को अवगत कराया जाएगा। इस लड़ाई में अन्य कर्मचारी संघों, सामाजिक संगठनों, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नर्सिंग संघ और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का समर्थन लिया जाएगा।
सरकारी तंत्र को कमजोर करने का आरोप
वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि सरकार जानबूझकर सरकारी तंत्र को कमजोर कर रही है। पहले सरकारी भवन और महंगे उपकरण बनाए जाते हैं, फिर उन्हें निजी कंपनियों को सौंप दिया जाता है। यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को खोखला करने की साजिश है। जिला संयोजक अरुण कुमार पाणिग्रही ने कहा कि निजीकरण से गरीब मरीज की जेब पर बोझ बढ़ेगा। बस्तर जैसे दूरस्थ अंचलों की स्वास्थ्य सेवा चौपट हो जाएगी।
CGMSC की लापरवाही मुख्य कारण
बैठक में बताया गया कि एचएलएल जितनी जांच का दावा कर रही है, उतनी जांच सरकारी एमएलटी पहले से कर रहे थे। परंतु CGMSC द्वारा समय पर किट्स, रिएजेंट और केमिकल उपलब्ध नहीं कराए जाते। इस कारण जांच कार्य 20 फीसदी तक ही सिमट कर रह जाता है। समस्या स्टाफ की दक्षता में नहीं, बल्कि संसाधनों की अनुपलब्धता में है। अरुण कुमार पाणिग्रही ने मांग की कि सरकार सरकारी लैब को आधुनिक मशीन और पर्याप्त संसाधन दे।