बस्तर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 11वीं शताब्दी के प्राचीन शिव मंदिर में 3,501 दीप प्रज्वलित कर भव्य दीपोत्सव का आयोजन हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में शिव भक्तों ने भाग लिया।
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल (बस्तर) द्वारा महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 11वीं शताब्दी के प्राचीन शिव मंदिर में 3,501 दीप प्रज्वलन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिव भक्तों ने भाग लिया और पुण्य के भागीदार बने।
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हर साल की तरह इस साल भी महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल बस्तर द्वारा शिवरात्रि की सुबह दीप प्रज्वलन किया गया और शाम को फिर हिंदू समाज के शिव भक्तों के साथ मिलकर धूमधाम से दीपोत्सव का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में श्रद्धालुगणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पुण्य कमाया।
यह शिवालय बस्तर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ग्यारहवीं शताब्दी का एक सुप्रसिद्ध शिवालय है, जहां के शिवलिंग को स्वयंभू कहा जाता है। यह शिवालय केंद्रीय पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित है और यह मंदिर भानसागर जलाशय के किनारे स्थित है। इस शिवालय का निर्माण 11वीं शताब्दी में तत्कालीन बस्तर के छिंदक नागवंशी राजाओं ने करवाया था।
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लोक मान्यता है कि यहां नि:संतानों की मनोकामना भोलेनाथ अवश्य पूरी करते हैं, वहीं भक्त इच्छा पूरी होने पर यहां त्रिशूल व धातु से निर्मित नाग अर्पित करते हैं। विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता इस मंदिर में प्रति वर्ष सावन एवं महाशिवरात्रि पर सेवा देते हैं।