केडीए की योजनाएं अक्सर किसानों से विवाद के कारण अटकती हैं लेकिन केडीए की माती योजना अधिकारियों की हीलाहवाली से आगे नहीं बढ़ पा रही है। योजना के बीच में आ रही करीब 20 एकड़ निजी जमीन किसान देने को राजी हैं।
केडीए अधिकारियों को अब दस्तावेज के सत्यापन से यह तय करना है कि किस किसान की कितनी जमीन है, ताकि मालिकाना हक का विवाद न रहे और निर्धारित मुआवजा दिया जा सके। केडीए वीसी किंजल सिंह ने भी योजना अटकने पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी।
किसानों ने अपनी सहमति दे दी है, अब केडीए अधिकारियों को ही तेजी दिखाने की जरूरत है। केडीए ने 2016 में माती में 36 एकड़ क्षेत्रफल में नई टाउनशिप बसाने की योजना पर काम शुरू किया था। वर्ष 2017 में नौ करोड़ रुपये के भुगतान के बाद ग्राम समाज की करीब 16 एकड़ जमीन केडीए ने जुटा ली थी।
बाकी 20 एकड़ जमीन लेने की कवायद जारी थी। वर्ष 2018 अप्रैल में हुई केडीए की बोर्ड की बैठक में भी कमिश्नर सुभाष चंद शर्मा ने माती के आसपास नई टाउनशिप विकास की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए थे।
डिमांड सर्वे में लोगों ने दिखाया उत्साह
इस साल जनवरी में केडीए ने माती योजना के लिए डिमांड सर्वे कराया था। योजना के अंतर्गत 35 वर्गमीटर से लेकर 162 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले कुल 419 भूखंडों के लिए पंजीकरण के आवेदन मांगे गए थे। जमीन की दर 16 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर तय की गई है। योजना में 1626 लोगों ने आवेदन किया था। हालांकि इसके बाद से योजना अटकी है।
कानपुर-इटावा हाईवे पर है योजना
कानपुर देहात (बनारअलीपुर गांव में) में केडीए की यह पहली योजना होगी। कानपुर-इटावा हाईवे से जुड़ी योजना अकबरपुर तहसील से एक किलोमीटर और कानपुर देहात मुख्यालय से डेढ़ किमी दूर है। शहर से माती मुख्यालय की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। केडीए माती में 3.75 करोड़ रुपये से पार्क और 3.50 करोड़ की लागत से सामुदायिक केंद्र का निर्माण करा रहा है।