दुनिया भले ही तुसाद संग्रालय की दीवानी हो लेकिन मेवात के बड़कली चौक पर बना मुंडल महल आजकल आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। राजस्थान व हरियाणा की सीमाओं के सटे हजारों गांवों के लोग इसे मिनी तुसाद यूजियम कहते हैं।
इसे देखने के लिए हजारों की तादाद में दूरदराज से लोग आते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्टैच्यू के लिए लंदन तुसाद की टीम भारत आई तभी से ही ये पैलेस सुर्खियों में आया। जिन बुजुर्गो ने बड़े संग्रालय, अजूबे और भारतीय हेरिटेज को नजदीक से नहीं देखा उनके लिए ये खास है।
तुसाद यूजियम की तर्ज पर तैयार इस पैलेस में सबसे पहले देश के चर्चित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिमूर्ति है। तो उनका मंत्री मंडल, प्रवक्ताओं के अलावा हरियाणा के मुयमंत्री मनोहर लाल खट्टर सहित अन्य खास चेहरों ने भी स्थान बनाया है।
बताते हैं कि इस भवन को ठीक लोकसभा चुनाव से पहले तैयार किया गया था। तब प्रदेश में हजकां भाजपा का गठबंधन परवान चढ़ चुका था। उसी की शक्ल में मुंडल महल का सौंदर्यकरण किया गया।
इसकी खासियत ये है कि सबसे उपर प्रधानमंत्री उसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमितशाह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी, राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर समेत राज्य के मुयमंत्री मनोहरलाल, कैप्टन अभिमन्यू, घनश्याम सर्राफ, रावनरबीर सिंह, कृष्णकुमार बेदी, हरियाणा मामलों के प्रभारी डॉ. अनिल जैन, प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, अनिल विज व अन्य शसियतों की तस्वीरों से पटा है।
अंदर की तरफ दुनियाभर के आठ अजूबे स्टैच्यू की शकल में नजर आते हैं तो वहीं लालकिला, बुलंद दरवाजा, जामा मस्जिद की सुन्दर चित्रकला लोगों को अपनी ओर खींच लाती हैं।
घागस गांव के 100 वर्षीय हाजी हुसैन खां व 85 वर्षीय हाजी सुब्बा जलालपुर सहित मेवात क्षेत्र के ज्यादातर बुजुर्ग मुंडल महल को छोटा तुसाद म्यूजियम मानते हैं। जिस शख्स ने इसे तैयार कराया है वो भारतीय जनता पार्टी का छोटा सा कार्यकर्ता है। ये करोड़ों रूपयों में तैयार किया गया है। अभी भी उपर की मंजिलों का काम बाकी है। भाजपा के प्रति इसी दीवानगी ने 2015 में आलम मुंडल को विधानसभा का टिकट भी दिलवाया था।