पहासू। क्षेत्र के गांव बनैल में किसान मुकेश राघव जैविक खेती के जरिए सब्जियां उगा रहे हैं। मध्य प्रदेश के सागर से प्रशिक्षण लेकर लौटे किसान मुकेश अन्य किसानों को भी जैविक खेती के गुर सिखा रहे हैं। उनका कहना है कि खेती में घातक रसायन और कीटनाशक दवाओं का प्रयोग तमाम तरह की खतरनाक बीमारियों को न्यौता दे रहा है। ऐसे में मानव जीवन को बचाने के लिए सभी किसानों को जैविक खेती अपनाना चाहिए। क्षेत्र के गांव बनैल निवासी किसान मुकेश राघव की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। फिर भी उन्होंने उन्नतशील किसानों से प्रेरणा लेकर जैविक खेती करने का निर्णय लिया। इसके लिए वह करीब दो साल पूर्व मध्यप्रदेश के सागर में प्रशिक्षण लेने गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने सात बीघे के रकबे में सब्जियों की खेती शुरू की। किसान मुकेश राघव केचुए के द्वारा जैविक खाद का प्रयोग कर लौकी, तोरई, खीरा, टमाटर, हरी मिर्च आदि सब्जिया उगाई हैं। अब वह अदरख की खेती की योजना भी बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि आगे वह आने वाली फसल धान, गेहूं भी उगाएंगे। उनकी इस खेती को देखकर गांव के अन्य किसान भी जैविक खेती करने का मन बना रहे हैं। कुछ लोगों ने इसकी शुरूआत भी कर दी है। किसान मुकेश राघव ने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग मानव जीवन पर असर डाल रहा है। उससे उगाए गए अनाज और सब्जियां कैंसर, चर्मरोग, फेफड़े से संबंधित रोग, शुगर, उच्च रक्तचाप आदि रोगों को पैदा कर रही हैं। जो मानव जीवन के लिए घातक है। ऐसे में सभी को जैविक खेती अपनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जैविक खेती के लिए वह क्षेत्र के किसानों को प्रेरित करेंगे और अधिक लोग इससे प्रभावित हों इसके लिए अभियान चलाएंगे। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के चलते सब्जियों की बिक्री को लेकर समस्या आई थी। लेकिन धीरे-धीरे अब बाजार खुलने से सब सही होने लगा है।