न्यायपालिका में नियुक्तियों को लेकर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के बयान की बसपा सुप्रीमो ने कड़ी निंदा की है। मंगलवार को जारी एक लिखित बयान में उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया न्यायपालिका को बार-बार अपमानित करने और नीचा दिखाने वाला है।
गौरतलब है कि सोमवार को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जजों की नियुक्ति को लेकर जारी विवाद पर कानून मंत्रालय की भूमिका पर बोलते हुए कहा था कि यह महज 'पोस्ट ऑफिस' नहीं है। कानून मंत्री होने के नाते उन्हें नियुक्तियों में सुझाव देने का संवैधानिक अधिकार है। बताते चलें कि यह पूरा विवाद कोलेजियम की सिफारिशों को सरकार द्वारा वापस भेजने पर शुरू हुआ था।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि न्यायपालिका के साथ सरकार का इस तरह का बर्ताव सही नहीं है। केंद्र सरकार के ऐसे रवैये के कारण न्यायपालिका आज अभूतपूर्व संकट झेल रही है। बीजेपी सरकार और उसके मंत्रियों को नसीहत देते हुए मायावती ने कहा कि अगर वह न्यायपालिका का सम्मान नहीं कर सकते तो कम से कम उसका अपमान भी न करें। यही नहीं, रविशंकर प्रसाद के बयान पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कानून मंत्रालय 'पोस्ट ऑफिस' नहीं है तो उसे 'पुलिस थाना' बनने का भी अधिकार नहीं है।
सरकारी नियुक्तियों में बीजेपी सरकार की नीतियों को कांग्रेस के समान बताते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा कि दलित, आदिवासियों व पिछड़े वर्ग के अफसरों की तैनाती करने में इस सरकार का रवैया भी द्वेषपूर्ण है। नीति निर्धारण मामलों के साथ न्यायपालिका में समाज के वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण भी संविधान को उसकी सही जनहिताय की मंशा के अनुरूप देश में आज तक ढाला नहीं जा सका है।