महाशिवरात्रि के दिन भगवाना शिव काे प्रसन्न करने के लिए भक्त क्या कुछ नहीं करते हैं। एेसे में अगर अाप मृत्यु दाेष या काल सर्प दोष से पीड़ित हैं ताे अापकाे शिवलिंग का अभिषेक नवग्रह अाैषधियाें से करना चाहिए। एेसा करने से अापके सभी दाेषाें का नाश हाेगा।
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शिवलिंग का अभिषेक
जन्म कुंडली में चंद्र नीच हाेने से सर्दी, अस्थमा, एवं अांखाें की समस्या हाेती है। इन सभी से छुटकारा पाने के लिए अापकाे महाशिवरात्रि के दिन दूध में काले तिल मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। यदि कुंडली में मंगल अशुभ स्थिती में है ताे खून व पेट से संबंधित बीमारियां हाेती हैं। इन बीमारियाें से छुटकारा पाने के लिए गिलाेय की बूटी के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें।
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दूध से अभिषेक
बुध अगर कुंडली में अशुभ स्थिती में है ताे स्किन, दांत एवं कफ से संबंधित बीमारियां हाेती हैं। इसे दूर करने के लिए विधारा की बूटी के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी राेगाें का नाश हाेता है। कुंडली में शुक्र कमजाेर हाेने पर याैन संक्रमण, कमजाेरी एवं शीत से संबंधित बीमारियां हाेती है। एेसे में अगर महाशिवरात्रि पर अाप पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं ताे सभी दाेषाें का नाश हाे जाएगा।
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शिवलिंग पूजन
जन्म कुंडली में शनि नीच का हाेने से अस्थमा खांसी एवं घुटनाें से संबंधित बीमारियां हाेती है। गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से ये सभी राेग दूर हाे जाएंगे। यदि कुंडली में गुरु नीच का है ताे पेट, फेफड़े से संबंधित राेग हाेते हैं। इन राेगाें का नाश करने के लिए दूध में पीले फूल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।
कुंडली में केतु नीच का है ताे सुगर, कान, गुप्तांग के राेग हाेते हैं। एेसी स्थिती में सरसाें के तेल से शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी राेगाें का नाश हाेता है। यदि कुंडली में राहु नीच का है ताे डिप्रेशन, बुखार जैसी बीमारियां हाेती हैं। इसका नाश करने के लिए शिवलिंग पर भांग के साथ नागकेसर से अभिषेक करें।