किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में डॉक्टरों के खाली पदों पर संविदा पर भर्ती की जाएगी। नियमित नियुक्ति में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है।राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियम के अनुसार, सभी क्लीनिकल या सुपर स्पेशियलिटी विभाग में कम से कम एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर तथा एक असिस्टेंट प्रोफेसर होना जरूरी है। इस लिहाज से विभाग में कम से कम तीन शिक्षक जरूर होने चाहिए।
इसके बावजूद केजीएमयू में इस समय नेफ्रोलॉजी, न्यूक्लीयर मेडिसिन, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, गैस्ट्रो मेडिसिन, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन, इमरजेंसी मेडिसिन समेत कई विभागों में या तो शिक्षक नहीं हैं या फिर मानक से कम हैं।
केजीएमयू प्रशासन ने वर्ष 2022 में 150 पदों पर डॉक्टरों की भर्ती निकाली थी। आरक्षण संबंधी विवाद और अन्य कानूनी अड़चन से करीब दो साल बाद वर्ष 2024 में यह भर्ती प्रक्रिया पूरी हो सकी। हालांकि, इसमें भी सिर्फ 77 डॉक्टरों का चयन हो सका। इस वजह से अब भी संस्थान में डॉक्टरों की कमी है।
इसको देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने संविदा के आधार पर डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। विभागवार डॉक्टरों की भर्ती का ब्योरा अगले दो-तीन दिन में जारी किया जाएगा। केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के मुताबिक, संविदा के आधार पर तैनाती की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके साथ ही नियमित पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रशासनिक पदों पर भी डॉक्टरों की तैनाती
चिकित्सा संस्थानों में इलाज के साथ ही प्रशासनिक कामकाज भी होते हैं। इनके लिए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के साथ ही चिकित्सा अधीक्षक और कई अन्य सहायकों के पद होते हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग आयोग ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत अन्य प्रशासनिक पदों पर नियमित नियुक्ति की अपेक्षा करता है।
केजीएमयू में चिकित्सा अधीक्षक के साथ ही उपकुलसचिव के पदों पर भी डॉक्टरों की तैनाती करने की मजबूरी है। असल में केजीएमयू प्रशासन ने कई बार उपकुलसचिव और सहायक कुलसचिव पदों के लिए शासन से मांग की है, पर अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। इससे इन पदों पर भी डॉक्टरों को ड्यूटी करनी पड़ रही है।