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UP Panchayat Chunav: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर क्या आदेश दिया है? जानें प्रधानी लड़ने के नियम

Wed, 14 Oct 2026 10:52 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

UP Panchayat Chunav: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया है। नए चुनाव होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक बने रहेंगे। यह फैसला इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनाया गया।
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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को ग्राम पंचायत चुनाव मामले में एक अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक नए चुनाव संपन्न नहीं हो जाते, तब तक सभी निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। यह याचिका प्रयागराज के इम्तियाज हुसैन और अन्य द्वारा समय पर चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर की गई थी। यह फैसला न्यायमूर्ति जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने शाम 4:00 बजे खुली अदालत में सुनाया। 

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ग्राम प्रधान चुनाव लड़ने के लिए क्या हैं आवश्यक नियम?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक है। यूपी में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को कुछ विशिष्ट शर्तों को पूरा करना होता है।

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चुनाव लड़ने के लिए क्या है पात्रता?

ग्राम प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ने हेतु उम्मीदवार को उस ग्राम पंचायत का निवासी होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, चुनाव लड़ने से पहले बकाया भुगतान जमा करना भी आवश्यक हो सकता है। चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेजों और नियमों का पालन करना होता है।

चुनाव खर्च की सीमा क्या?
ग्राम प्रधान पद के प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए एक निश्चित राशि खर्च करने की अनुमति होती है। यह राशि कुछ सौ रुपये से लेकर हजारों रुपये तक हो सकती है। चुनाव खर्च का ब्योरा देना भी एक महत्वपूर्ण नियम है, जिसका पालन न करने पर कार्रवाई हो सकती है।

अन्य महत्वपूर्ण नियम भी जानें?
चुनाव लड़ने के लिए जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है, जिसके लिए उम्मीदवारों को लेखपालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए नए नियमों के अनुसार, ग्राम प्रधान या क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए कुछ विशेष कार्य करना या नियमों का पालन करना जरूरी हो सकता है।

क्या प्रशासक बनाए गए ग्राम प्रधानों को मानदेय का नियम?
प्रदेश में प्रशासक बनाए गए ग्राम प्रधानों को मानदेय देने का नियम नहीं है। मई में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बना दिया गया था।

प्रधानों को कितना मिलता मानदेय?
प्रशासकों को ग्राम प्रधान का दर्जा नहीं दिया जा सकता। इसलिए उन्हें मानदेय भी नहीं मिल सकता। यहां बता दें कि यूपी में 58213 ग्राम पंचायतें, 827 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। प्रधानों को प्रति माह 5 हजार रुपये देने का प्रावधान है। 

इसी तरह ब्लॉक प्रमुखों को 11300 रुपये और जिला पंचायत अध्यक्षों को 15500 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है। लेकिन, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अब ये पदाधिकारी निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं रह गए हैं। जब भी एडीओ पंचायत प्रशासक बनाए गए तो उन्हें भी कोई मानदेय नहीं दिया जाता था।
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कब और क्या कहा कोर्ट ने 
जून 2026 में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को 6 महीने के लिए प्रशासक नियुक्त किए जाने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि चुनाव टालकर मनमाने ढंग से लंबे समय तक प्रशासक नियुक्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार और ओबीसी आरक्षण आयोग से चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा (टाइमलाइन) और रिपोर्ट का विवरण मांगा था। 

- जुलाई में अगली तारीख की सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासनिक व कानूनी पहलुओं और अन्य पीठों में चल रहे मामलों का हवाला देते हुए सुनवाई को कुछ हफ्तों के लिए आगे बढ़ा दिया था।  

-सितंबर से लेकर अक्तूबर के पहले हफ्ते तक चली लंबी बहसों और कुल 11 याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय निकायों को ज्यादा दिनों तक बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के नहीं रखा जा सकता।
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