मकरसंक्रांति के दूसरे दिन दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु।
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मकरसंक्रांति के दूसरे दिन बृहस्पतिवार ठंड के बावजूद गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने वालों का रेला लगा रहा। श्रद्धालुओं की कतार टूटने नहीं पाई। हालांकि मेला परिसर में लोगों की भीड़ कम रही। लोग ठंड की वजह से खिचड़ी चढ़ाकर सीधे घरों को रवाना हो गए।
मकरसंक्रांति का पर्व भले ही एक दिन मनाया जाता है पर गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालु एक महीने तक गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। खिचड़ी के बाद पड़ने वाले बुढ़वा मंगल को मंदिर में फिर भारी भीड़ होती है। उस दिन भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और बाबा गुरु गोरखनाथ को अपनी खिचड़ी चढ़ाते हैं। उस दिन का नजारा भी खिचड़ी के त्योहार जैसा ही होता है। ऐसी मान्यता है कि बुढ़वा मंगल को खिचड़ी चढ़ाने का महातम भी मकरसंक्रांति जैसा ही होता है। इस दिन खिचड़ी चढ़ाने वालों में ज्यादातर शहर के लोग होते हैं।
सुरक्षा समिति ने गोरखनाथ मंदिर में लगाया कैंप
उत्तर प्रदेश सुरक्षा समिति की ओर से किरन चंद गुप्ता के दिशा-निर्देश में मकरसंक्रांति के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के मेन गेट पर कैंप लगाया गया। इसके जरिए खोए हुए बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया गया। कैंप में 200 कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लेकर भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन का सहयोग किया।
यह जानकारी किरण चंद गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि कैंप को सफल बनाने में केडी अग्रवाल, राजीव कुमार, लालबिहारी निषाद, श्रीराम सिंह, अभय निषाद, उमेश सिंह, सुनीता सिंह, अशरफ अली, कयूम, लालजी, रामसुमेर ने अपना योगदान दिया।