नोटबंदी के बाद से कैशलेस अर्थव्यवस्था की बात हो रही है। ऐसे समाज के सपने को साकार करने में तकनीक का सबसे बड़ा योगदान होगा। यही कारण है कि भारतीय भाषाओं के माध्यम से तकनीक को जन-जन तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस दिशा में मोबाइल वॉलेट कंपनी पेटीएम के बाद गुरुग्राम की प्रोसेस 9 टेक्नॉलजी ने भी कदम बढ़ा दिया है। इस कंपनी द्वारा स्मार्टफोन के लिए बहुभाषी %मॉक्स वड्र्स’ की बोर्ड को लांच करने की घोषाणा की गई है। बताया जा रहा है कि इसका ले-आउट काफी सरल है। इस्तेमाल करने वालों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
इस बहुभाषी मॉक्स वड्र्स को डिजिटल रूप से विभाजित एक अरब से अधिक भारतीयों तक पहुंचने की योजना है। इस कीबोर्ड में 22 भारतीय भाषाएं समाहित हैं। मॉक्स वड्र्स सरकार द्वारा प्रस्तावित त्रिभाषा सूत्र का अनुपालन करता है।
जिससे कि कीपैड वाले फोन का इस्तेमाल देश के किसी भी कोने में तीन प्रचलित भाषाओं में किया जा सके। हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मोबाइल फोन में अंग्रेजी और हिंदी के साथ-साथ कम से कम एक आधिकारिक भारतीय भाषा का होना अनिवार्य कर दिया है।
प्रोसेस नाइन टेक्नॉलोजीज की सीओओ विदुषी कपूर ने बताया कि कंपनी का लक्ष्य एक अरब से अधिक उन भारतीयों तक पहुंचने का है जो अंग्रेजी नहीं बोल पाते। वह मुख्य रूप से अपनी मूल भाषा में ही बातचीत करते हैं। मॉक्स वड्र्स से देश में डिजिटल भाषागत विभाजन को दूर करने व लोगों को संवाद की शक्ति प्रदान करने का इसके माध्यम से प्रयास किया जा रहा है।