जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा है कि हमें सरकार की बात भी सुननी चाहिए। साथ ही अपना पक्ष भी रखना चाहिए। अगर आरक्षण बिल में जल्दबाजी की गई तो पिछले बिल जैसा ही हाल होगा। जाट आरक्षण आंदोलन के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद वीरवार को जाट धर्मशाला में प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग हुई।
बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार की तरफ से मिले न्योते पर समिति ने निर्णय लिया है कि समिति का 90-100 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बातचीत में शामिल होगा। बातचीत में आरक्षण संबंधी बिल के प्रारूप पर चर्चा की जाएगी। समिति की तरफ से सरकार को सुझाव दिए जाएंगे। उन्होंने फिर दोहराया कि जाटों को बैकवर्ड में आरक्षण चाहिए। सरकार से 14 मार्च को ज्ञापन के जरिए की गई 7 मांगों पर भी जानकारी लेंगे।
21 मार्च को दिल्ली के नांगलोई स्थित जाट धर्मशाला में बैठक होगी। उक्त बैठक में तीन राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हरियाणा से प्रत्येक जिले के प्रतिनिधि भी होंगे। सहमति नहीं बनी तो 48 से 72 घंटे के अल्टीमेटम पर आंदोलन शुरू कर देंगे। हमारी प्राथमिकता मुद्दे का समाधान है। अगर सरकार जाटों को सही तरीके से आरक्षण दे देती है तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पिछले आंदोलन के दौरान हुई आगजनी, तोड़फोड़ की घटनाओं के बारे में मलिक ने कहा कि कुछ लोगों ने राजनीतिक रोटियां सेंकी। जिस हिसाब से खुलासे हो रहे हैं उसमें सत्तारूढ़ और विपक्ष के नेता भी शामिल थे। बैठक की अध्यक्षता सूबे सिंह ढाका ने की। इस दौरान दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अशोक लाकड़ा, प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक, जिलाध्यक्ष कृष्ण किरमारा, मूलचंद दहिया, दलीप सहारण, झाबर सिंह, रणजीत, विनोद झोरड़, चंद्रभान काजला, सुरेश पानू सहित अन्य जाट नेता उपस्थित थे।