कश्मीर में बिगड़ते हालातों और एलओसी पर पाकिस्तान की ओर से हो रही गोलाबारी के बीच जम्मू कश्मीर एक बार फिर सुरक्षा की अनिश्चितता से जूझता दिख रहा है। बीते कुछ दिनों में कश्मीर घाटी में जिस तरह छात्र हिंसा और स्टूडेंट अनरेस्ट की स्थिति उपजी है उससे रियासत और खासकर घाटी के हालातों में सुरक्षा के नजरिए से किसी बड़े फैसले की जरूरत दिखने लगी है लेकिन इस फैसले के पहले रियासत में सियासत को माप लेना काफी अहम होगा।
दरअसल कश्मीर में जैसे हालात हैं उसे देखकर ये लगने लगा है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन की जरूरत स्थितियां बनने लगी हैं। इसका कारण सियासी हो न हो लेकिन सुरक्षा के नजरिए से उस वक्त की जरूरत आ गई है जबकि सत्ता और सियासत को सुरक्षा के रास्ते में बाधा बनने से रोकना होगा।
सुरक्षा के लिहाज से कश्मीर में तमाम एजेंसियां पत्थरबाजों पर बड़ी कार्रवाई के पक्ष में हैं। सूत्रों के मुताबिक एजेंसियों की सिफारिश है कि पत्थरबाजों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें कश्मीर घाटी से बाहर की किसी जेल में रखा जाए।