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बेरोजगारों के लिए नई सौगात, कर सकेंगे मनचाहा बिजनेस

Fri, 26 May 2017 10:21 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश में पलायन रोकने और बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने के लिए इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के तत्वावधान में उद्योगपतियों ने विकास का रोडमैप तैयार किया है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) प्रदेश में स्किल ट्रेनिंग, बैंक लिंकेज देगा। जल्द ही इस प्लान को वह मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपेंगे। इस प्लान में प्रदेश के सूने हो चुके करीब तीन हजार गांवों में रौनक लौटाने पर खास फोकस किया गया है।
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सभी उद्योगपतियों ने क्षेत्रों का भ्रमण करने के बाद ग्राउंड लेवल पर यह रोडमैप तैयार किया है। मसलन, अगर रुद्रप्रयाग में लीसा की पैदावार होती है तो वहां उसी पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इस रोडमैप के तहत हर क्षेत्र की खूबियों, कमजोरियों, क्षमताओं और अवसरों को ध्यान में रखा गया है। उनका मकसद स्थानीय आर्थिक विकास है। इस प्लान को जल्द ही वह सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपेंगे। एसोसिएशन ने यह भी तय किया है कि वह प्रदेश के युवाओं को मुफ्त स्किल ट्रेनिंग देंगे।

छात्र के लिए 15 दिन अपने गांव में रहना अनिवार्य

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पलायन को रोकने के लिए इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि सभी शिक्षण संस्थानों में नया नियम लागू किया जाए। इसके तहत यह तय किया जाए कि हर छात्र-छात्रा गर्मियों की छुट्टियों में अनिवार्य तौर पर अपने गांव जरूर जाए। 15 दिन तक गांव में रहने पर उसे प्रमाण पत्र दिया जाए या फिर उसके सर्टिफिकेट में उसकी यह वेकेशन शामिल की जाए। इससे बच्चों में अपने पहाड़ के प्रति प्रेम भाव बढ़ेगा और नई संभावनाओं को लेकर भी उनका दिमाग खुलेगा।
 
रोडमैप में स्कूलों के ड्रॉपआउट स्टूडेंट्स को भी शामिल किया गया है। तमाम ऐसे युवा हैं जो कि किसी न किसी वजह से पांचवीं और आठवीं के बाद स्कूल छोड़ देते हैं। इनके पास न साक्षरता है और न ही कोई स्किल। ऐसे युवाओं को नई राह दिखाने के लिए स्किल्ड बनाया जाएगा।
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उत्तराखंड में खाली पड़े हैं 1053 गांव

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2013 की जनगणना के आंकड़ों से प्रदेश में पलायन के चिंताजनक हालात सामने आए। जनगणना के मुताबिक उत्तराखंड में कुल 16,793 गांव हैं, जिनमें से 1053 गांव पूरी तरह से खाली पड़े हैं। यहां के लोग या तो मैदानी इलाकों में या फिर दूसरे राज्यों व दूसरे देशों को पलायन कर गए हैं।

इसी प्रकार, 405 गांव ऐसे हैं, जिनमें दस व्यक्तियों से कम निवास करते हैं। यह भी लगभग सूनेपन की श्रेणी में हैं। वर्ष 2013 की आपदा और भूकंप के बाद पलायन का सिलसिला इससे भी ज्यादा बढ़ा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक अनुमानित तौर पर करीब तीन हजार गांव खाली हो गए हैं।

प्रदेश में लगातार उद्योगों को पहाड़ चढ़ाने की कवायद चल रही है लेकिन अभी तक 20 प्रतिशत से भी कम उद्योग ही पहाड़ में स्थापित हो पाए हैं। यह सभी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग हैं। कोई बड़ी इंडस्ट्रीज पहाड़ न जाने की वजह से रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पाए। सरकार ने 2008 में हिल पॉलिसी लागू की जो कि 2017 में खत्म होने से पहले ही वर्ष 2015 में एमएसएमई पॉलिसी बन गई। बावजूद इसके पहाड़ उद्योग और रोजगार से दूर है।

यह सुझाव भी शामिल
-जो लोग पहाड़ में अपना काम शुरू करना चाहेंगे, उन्हें आईएयू की ओर से बैंक लिंकेज उपलब्ध की जाएगी। यानी, बैंक से लोन का इंतजाम आसान किया जाएगा।
-पहाड़ में क्षेत्र विशेष में पैदा होने वाली चीजों को औद्योगिकीकरण से जोड़ने के लिए कच्चा माल पहाड़ से आयात किया जाएगा।

इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि हमने प्रदेश में ग्राउंड लेवल पर यह रोडमैप तैयार किया है। हमारा मकसद पलायन को खत्म कर परदेस में बस चुके लोगों को उत्तराखंड वापस लाने के साथ ही यहां के बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ना है। जल्द ही हम यह रोडमैप मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। 
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