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नया दौरः ‘मैं ससुराल नहीं जाऊंगी लेकिन पति संग ही घर बसाऊंगी’

Tue, 13 Jun 2017 10:35 AM IST
ऐश्वर्या द्विवेदी,अमर उजाला, कानपुर
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दौर बदल रहा है। आज के समय में लड़कियां शादी का लड्डू तो खाना चाहती हैं पर ससुराल में रहना उन्हें पसंद नहीं है । वे शादी तो करना चाहती है पर शादी के तुरंत बाद ही पति के साथ ससुराल से अलग होकर के रहना चाहती हैं। जहां पर उन्हें हर तरह की आजादी मिल सकें और किसी भी तरह की रोकटोक करने वाला कोई मौजूद न हो। कुछ तो अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए इसे बहुत जरूरी बताती हैं। कानपुर शहर में भी यह चलन बहुत तेजी से अपनी जगह बना रहा है । मैरिज ब्यूरो संचालकों से बातचीत में यह बात सामने आई है की १० में से ८ लड़कियों की यही राय है। समाजशास्त्री इसे अच्छा संकेत नहीं मान रहे।
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आंकड़ा बढ़ रहा है
कानपुर शहर के मैरिज ब्यूरो के संचालक प्रशांत के मुताबिक 10 में से 8 लड़कियों की डिमांड यही होती है कि वो शादी के बाद पति के परिवार वालों के साथ नहीं रहेंगी। वहीं एक अन्य मैरिज ब्यूरो की संचालक सविता ने भी बताया कि अधिकतर लड़कियों का यही कहना होता है कि जहां पर पति नौकरी कर रहा होगा वह भी वहां जाकर रहेंगी और नौकरी करेंगी।
 
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इसलिए साथ रहना नहीं चाहतीं
प्रशांत ने बताया कि लड़कियों का साफ कहना है कि वह शादी के बाद किसी भी तरह की पारिवारिक कलह ना हो इसलिए वह पति के परिवार से दूरी बनाकर रखना चाहती हैं। लॉ की छात्रा आर्या राजे ने बताया कि आज के समय में करियर ग्रोथ अपनी ज़िन्दगी में बहुत जरूरी है। इसके लिए घर से ज्यादा ऑफिस में टाइम देना पड़ता है। शादी के बाद सास-ससुर को कुछ चीजे उनकी न पसंद आए और घर में आए दिन झगड़े होंगे। वह ऐसा नहीं चाहतीं इसलिए शादी के बाद वह सास-ससुर से अलग रहेंगी। वहीं, मार्केंटिंग एक्सपर्ट अंकिता मिश्रा का कहना है कि ससुराल में देर से उठो तो गुस्सा, कोई काम समय पर नहीं हुआ तो गुस्सा, क्या पहनना है, कहां जाना है, इन सब पर सास-ससुर टोकते रहते हैं वह अपनी जिंदगी में इस तरह का हस्तक्षेप बिल्कुल नहीं चाहतीं। जिसकी वजह से वह शादी के बाद पति के परिवार से अलग ही रहेंगी।
 

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उपभोक्तावादी हो गई है नई पीढ़ी
समाजशास्त्री जयशंकर पांडेय का कहना है कि आज की पीढ़ी उपभोक्तावादी और सुखवादी हो गई है। प्रेम, सेवा भाव, लगाव, अपनापन, सहयोग और आत्मीयता जैसे सामाजिक गुण उनमें कहीं ख़त्म होते जा रहे हैं। वे आत्मकेंद्रित हो रहे हैं। इसी सोच के कारण वे शादी के बाद मां-बाप व परिवार से अलग रहना चाहते हैं। आज की पीढ़ी अपने जीवन में किसी भी व्यक्ति का हस्तक्षेप पसंद नहीं करना चाहती है व अपने तरीके से जीवन को जीना चाहती है।
 
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ऐसे सुधरेंगे रिश्ते
समाजशास्त्री जयशंकर पांडेय का कहना है कि सास-बहू का रिश्ता एक ऐसा होता है जिसमें उन्हें एक दूसरे को समझने में थोड़ा समय लगता है। हर लड़की शादी के बाद ढेरों सपने बुनकर ससुराल आती है। जरूरी है कि धैर्य रखे , ससुराल पक्ष और बहू अपने नए रिश्तों को थोड़ा समय देकर एक दूसरे को समझने की कोशिश करें इससे रिश्ता धीरे-धीरे मजबूत होता है।
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