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Lok Sabha Elections: तो हरिद्वार लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट होगा पंचायत चुनाव, भगवा फहराने के भाजपा के इरादे

Wed, 20 Jul 2022 02:46 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

अभी तक पंचायत चुनाव में बसपा व कांग्रेस की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि चुनाव से पहले भाजपा की योजना दोनों दलों में सेंध लगाकर उन्हें कमजोर करने की है। विधानसभा चुनाव में 47 सीटें जीतकर भाजपा बेशक प्रदेश की सत्ता पर काबिज है, लेकिन हरिद्वार में अपेक्षित परिणाम न मिलने का उसे मलाल भी है। पार्टी हरिद्वार में अपनी वापसी का सही अवसर तलाश रही है।
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पंचायत चुनाव परिणाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरिद्वार जिले में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को भाजपा के लिए आगामी लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। अबकी बार भाजपा के मंसूबे हरिद्वार जिला पंचायत पर भगवा बुलंद करने के हैं। पार्टी पंचायत चुनाव में शानदार प्रदर्शन के जरिये न सिर्फ विधानसभा चुनाव की हार का हिसाब बराबर करना चाहती है बल्कि आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में जीत तय करने का संदेश देना चाहती है। 

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विधानसभा चुनाव में 47 सीटें जीतकर भाजपा बेशक प्रदेश की सत्ता पर काबिज है, लेकिन हरिद्वार में अपेक्षित परिणाम न मिलने का उसे मलाल भी है। पार्टी हरिद्वार में अपनी वापसी का सही अवसर तलाश रही है। सियासी जानकारों का मानना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को भाजपा हरिद्वार जिले में अपने वर्चस्व की साबित करने के अवसर के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि पार्टी ने चुनावी एलान से पहले ही पूरे जिले में सियासी चौसर बिछानी शुरू कर दी है। 

हाल ही में पार्टी ने बसपा और कांग्रेस के 40 से अधिक स्थानीय नेताओं को भाजपा में शामिल कराकर अपने पक्ष में वातावरण होने के संदेश देने की कोशिश की। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का मानना है कि भाजपा में शामिल हुए सभी नेताओं का अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव है, जिसका पार्टी को निश्चित तौर पर फायदा होगा।
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पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार भाजपा हरिद्वार जिला पंचायत पर भगवा बुलंद कर पंचायत चुनाव का इतिहास बदलना चाहती है। अभी तक भाजपा का हरिद्वार जिला पंचायत के अध्यक्ष पद की कुर्सी का सपना साकार नहीं हो पाया है लेकिन इस बार पार्टी जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों की जो व्यूह रचना तैयार कर रही है, उससे अपना मकसद पूरा होने की पूरी उम्मीद है। 

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बसपा व कांग्रेस की अहम भूमिका

अभी तक पंचायत चुनाव में बसपा व कांग्रेस की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि चुनाव से पहले भाजपा की योजना दोनों दलों में सेंध लगाकर उन्हें कमजोर करने की है। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से हरिद्वार में पंचायत चुनाव खासा अहम माना जा रहा है। सियासी जानकारों इसे हरिद्वार लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट तक करार दे रहे हैं। बसपा और कांग्रेस के नेताओं को तोड़कर भाजपा में लाने की मुहिम का नेतृत्व हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक कर रहे हैं। ऐसे संकेत हैं कि डॉ. निशंक के नेतृत्व में अभी कई और कांग्रेस और बसपा नेता और कार्यकर्ता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं की चाहत जिला पंचायत चुनाव लड़ने की भी है। इस बात का इल्म पार्टी को भी है, इसलिए उसने पहले ही एक तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है।

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हरिद्वार में भाजपा की स्थिति 

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा हरिद्वार सीट पर ज्वालापुर, भगवानपुर, पिरान कलियर, मंगलौर सीट पर पिछड़ गई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे सिर्फ तीन सीटों हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर और रुड़की में बढ़त मिली। उसे ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, खानपुर, मंगलौर, लक्सर और हरिद्वार ग्रामीण में पराजय का सामना करना पड़ा। पार्टी इस पराजय का हिसाब पंचायत चुनाव से चुकता करना चाहती है। 
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