बसपा व कांग्रेस की अहम भूमिका
अभी तक पंचायत चुनाव में बसपा व कांग्रेस की अहम भूमिका रही है। यही वजह है कि चुनाव से पहले भाजपा की योजना दोनों दलों में सेंध लगाकर उन्हें कमजोर करने की है। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से हरिद्वार में पंचायत चुनाव खासा अहम माना जा रहा है। सियासी जानकारों इसे हरिद्वार लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट तक करार दे रहे हैं। बसपा और कांग्रेस के नेताओं को तोड़कर भाजपा में लाने की मुहिम का नेतृत्व हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक कर रहे हैं। ऐसे संकेत हैं कि डॉ. निशंक के नेतृत्व में अभी कई और कांग्रेस और बसपा नेता और कार्यकर्ता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। इनमें से ज्यादातर नेताओं की चाहत जिला पंचायत चुनाव लड़ने की भी है। इस बात का इल्म पार्टी को भी है, इसलिए उसने पहले ही एक तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है।
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हरिद्वार में भाजपा की स्थिति
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा हरिद्वार सीट पर ज्वालापुर, भगवानपुर, पिरान कलियर, मंगलौर सीट पर पिछड़ गई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे सिर्फ तीन सीटों हरिद्वार, बीएचईएल रानीपुर और रुड़की में बढ़त मिली। उसे ज्वालापुर, भगवानपुर, झबरेड़ा, पिरान कलियर, खानपुर, मंगलौर, लक्सर और हरिद्वार ग्रामीण में पराजय का सामना करना पड़ा। पार्टी इस पराजय का हिसाब पंचायत चुनाव से चुकता करना चाहती है।