रियासत में दो लोकसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सीधा मुकाबला नेकां-क्रांगेस गठबंधन बनाम पीडीपी-भाजपा गठबंधन के बीच है। श्रीनगर में नामांकन भरने के आखिरी दिन मंगलवार को भी भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने के बारे में फैसला न किए जाने से यह माना जा रहा है कि अब पार्टी पीडीपी का चुनाव में समर्थन करेगी।
मौजूदा चुनाव में नेकां के दिग्गज नेता फारूक अब्दुल्ला तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई है। हाल ही में सक्रिय राजनीति में आए महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर की प्रतिष्ठा भी फंसी हुई है। इसी वजह से गठबंधन सरकार के लिए यह चुनौती है।
वर्ष 2014 के चुनाव में पहली बार हार का स्वाद चखने वाले फारूक अब्दुल्ला उपचुनाव में पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरे हैं। उनके साथ इस बार कांग्रेस का भी साथ है। कहा जा रहा है कि यह चुनाव जीतना फारूक के राजनीतिक करियर के लिए महत्वपूर्ण है। इस वजह से दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
कश्मीरियों में कश्मीर हिंसा के बाद पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ उपजे आक्रोश को भुनाने की कोशिशें की जा रही हैं। एजेंडा आफ अलायंस को लेकर सरकार की नाकामी को भी प्रचारित किया जा रहा है। मसलन शांति बहाली के लिए सभी वर्गों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने, सीजफायर उल्लंघन तथा आतंकी हमले की घटनाएं बढ़ने, पावर प्रोजेक्ट की वापसी जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।