गौर हो कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस पहले से ही अलग-अलग खेमों में बंटी हुई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकेश अग्निहोत्री व कुलदीप कुमार जहां वीरभद्र समर्थक हैं, वहीं पहली बार विधानसभा में निर्वाचित होकर आए सतपाल रायजादा प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खु के प्रबल समर्थक माने जाते हैं।
इस प्रकरण के बाद मुकेश अग्निहोत्री को मंच पर आकर स्थिति संभालनी पड़ी। गुटबाजी के ताजा घटनाक्रम से जहां कांग्रेस की किरकिरी हुई वहीं, लोकसभा चुनावों से पूर्व ही बड़े नेताओं के बीच की रार भी मुखर होने लगी है। हमीरपुर संसदीय सीट पर पिछले 25 वर्षों से लगातार भाजपा का कब्जा है।
तीन बार अनुराग ठाकुर तो इससे पूर्व प्रो. प्रेम कुमार धूमल व सुरेश चंदेल लगातार भाजपा की सीट पर काबिज रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए इस सीट पर भाजपा से मुकाबला इतना आसान नहीं माना जा रहा।
शनिवार को हुए कांग्रेस सम्मेलन में भी कई नेताओं ने प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर लोकसभा सीट को लेकर अपनी दावेदारी जताई। गगरेट से लगातार तीन बार विधायक रहे राकेश कालिया भी अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी दावेदारी जताने से नहीं चूके।
उन्होंने प्रदेश प्रभारी के समक्ष पूर्व में हुई अपनी जीत में वोटों के गणित का हिसाब रखा। कुल मिलाकर भाजपा से मुकाबले को पहले कांग्रेस को गुटबाजी की खाई को पाटना होगा।
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि कांग्रेस पार्टी न केवल हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में बल्कि पूरे प्रदेश में एकजुट है। कार्यकर्ताओं के बीच मनमुटाव सामान्य व स्वाभाविक है।
हर पार्टी के बीच यह चलता है। पार्टी से जो लोग निष्कासित हैं या नाराज हों, उनसे अलग से बात की जाएगी। कांग्रेस एकजुट होकर लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देगी।