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Prayagraj : प्रसिद्ध लेखक एवं चित्रकार जयंत कुमार घोष का निधन, रात्रि 12:15 बजे ली अंतिम सांस

Fri, 31 Jan 2025 06:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जयंत कुमार घोष द्वारा बनाई गई 150 स्वतंत्रता सेनानियों की चित्र उन्होंने इलाहाबाद संग्रहालय, उत्तर प्रदेश सरकार को दान दे दी थी जो कि वर्तमान में इलाहाबाद संग्रहालय के आजाद गैलेरी में जनता के अवलोकन के लिए रखी गई है I 
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जयंत कुमार घोष। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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प्रसिद्ध लेखक एवं चित्रकार जयंत कुमार घोष (80 वर्ष) का गत 31 जनवरी (रात्रि 12:15 बजे) दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। स्वास्थ्य एंड परिवार कल्याण ट्रेनिंग सेंटर, मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज से सेवानिवृत्त जयंत कुमार घोष अपने पीछे धर्मपत्नी मीरा घोष, पुत्र इंद्रनील घोष, पुत्री देविका एवं देवोंश्री घोष को छोड़ गए। नादर्न फुटबॉल एकेडमी के मुख्य फुटबॉल प्रशिक्षक इंद्रनील घोष ने बताया कि रात में पिताजी की तबीयत अचानक खराब हो गई। उन्हें झलवा स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां काफी प्रयास के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। 

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अर्जुन और पद्मश्री पुरस्कार विजेता पूर्व भारतीय फुटबॉल कप्तान चुन्नी गोस्वामी के साथ जयंत घोष। - फोटो : अमर उजाला।
कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं जयंत घोष

जयंत कुमार घोष द्वारा बनाई गई 150 स्वतंत्रता सेनानियों की चित्र उन्होंने इलाहाबाद संग्रहालय, उत्तर प्रदेश सरकार को दान दे दी थी जो कि वर्तमान में इलाहाबाद संग्रहालय के आजाद गैलेरी में जनता के अवलोकन के लिए रखी गई है I एक बेहतरीन पेंसिल चित्रकार के साथ साथ जयंत कुमार घोष नें स्वतंत्रता सेनानियों के ऊपर दो विभिन्न किताब भी लिखी थीं जो इंडियन प्रेस कोलकाता द्वारा प्रकाशित की गई है। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। 
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कलाकार और लेखक जयंत कुमार घोष को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। - फोटो : अमर उजाला।
समय समय पर जयंत घोष द्वारा लगायी गई स्वतंत्रता सेनानियों की राष्ट्रीय प्रदर्शनी 1994 से 2010 के बीच महात्मा गांधी कला वीथिका प्रयागराज, कलकत्ता, भोपाल, सिलीगुड़ी, वर्धमान में सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। जयत घोष के निधन पर विभिन्न खेल संगठनों और खिलाड़ियों ने शोक जताया है। उनका अंतिम संस्कार रसूलाबाद घाट पर शुक्रवार को दोपहर बाद तीन बजे किया गया। मुखाग्नि इकलौते पुत्र इंद्रनील घोष ने दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में खिलाड़ी, साहित्यकार और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। 
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