आपके घर में 14-20 साल के बच्चे हैं तो यह खबर आपको आगाह करने के लिए है। अगर बच्चा अचानक गुमसुम रहने लगे, पढ़ाई बंद कर किताब-कॉपियां फाड़ने लगे या आत्महत्या जैसी बातें करे तो हो सकता है कि वह साइबर बुलिंग या दादागीरी की चपेट में हो। यह राजधानी के किशोरों को गहरे अवसाद में धकेल रही है। चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे अवसादग्रस्त मरीजों में 70 प्रतिशत बेटियां हैं।
केजीएमयू के मानसिक रोग विभाग के डॉ. आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि एक ओपीडी में औसतन दो मरीज ऐसे आते हैं जिनके अवसाद का कारण साइबर बुलिंग है। हफ्ते में ऐसे मरीजों की संख्या का औसत 30 है। लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला कहते हैं कि वर्चुअल दुनिया से ज्यादा लगाव के कारण बच्चे तेजी से अवसाद के शिकार हो रहे हैं। एक ओपीडी में चार बच्चे आते हैं तो इनमें से तीन साइबर बुलिंग या इंटरनेट एडिक्शन के शिकार होते हैं।