सरकारी सिस्टम का मुंह ताकने के बजाय यातायात सुविधा के लिए गोदी-गिवाला के ग्रामीणों ने श्रमदान कर 600 मीटर सड़क बना दी। 40 दिन तक चले श्रमदान में गांव की महिलाओं, बच्चों और बड़ों ने अपनी भागीदारी की। दो दिन पहले इस सड़क से कार भी गांव तक पहुंच गई।
रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद की सीमा पर बसे 130 परिवारों वाले गोदी-गिवाला गांव के ग्रामीणों ने अक्तूबर तीसरे सप्ताह में खुली बैठक कर गांव तक सड़क पहुंचाने का निर्णय लिया। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए ग्राम पंचायत निधि से एक लाख रुपये निकाले गए। इसके अलावा प्रति परिवार स्वेच्छानुसार चंदा एकत्रित किया गया, जिसमें डेढ़ लाख रुपये जमा हुए।
इस धनराशि से ग्राम प्रधान संपत्ति देवी सहित ग्रामीणों ने पोगठा गांव के समीप अपनी भूमि से सड़क की कटिंग के लिए जेसीबी की व्यवस्था की। वहीं बच्चे, बड़े और महिलाओं ने सड़क निर्माण में मलबा सफाई से लेकर पत्थर कटान व पुश्ता लगाने में सहयोग दिया।
करीब 40 दिन में गांव के आवासीय घरों के पास तक 600 मीटर सड़क तैयार कर ली गई। बीते रविवार को मेहलसैंण से सड़क से होते हुए कार गांव तक पहुंची तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे। गांव के वयोवृद्घ शोभा सिंह, रुपली देवी, युद्धवीर सिंह नेगी, कलम सिंह, गोपी सिंह, दिनेश सिंह, बीरेंद्र आदि का कहना है कि बीते छह वर्ष से शासन, प्रशासन और विभाग से सड़क निर्माण की गुहार लगाते आ रहे थे, लेकिन सुध नहीं ली गई। ऐसे में ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क उठाने का बीड़ा उठाया। सड़क निर्माण में दो लाख 30 हजार रुपये खर्च हुए हैं।
करीब 8 वर्ष पूर्व कनकचौंरी-रौंता मोटर मार्ग स्वीकृत किया गया था। इसी मार्ग से गोदी-गिवाला गांव को भी जुड़ना था। पीएमजीएसवाई द्वारा कनकचौरी से पोगठा तक पांच किमी सड़क का निर्माण किया गया। इसके बाद साढ़े छह किमी सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी लोनिवि को सौंपी गई, लेकिन पांच-छह वर्ष से पोगठा के ग्रामीणों की आपत्ति के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में गोदी, गिवाला और रौता के ग्रामीण पैदल नाप रहे हैं।
लोनिवि पोखरी के ईई बीरेंद्र जौहरी का कहना है कि ग्रामीणों की आपत्ति के कारण सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। अब एलायन्मेंट बदलने के लिए कार्रवाई की जा रही है।