लेखक अमिश त्रिपाठी को सम्मानित करते हुए।
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एआई ट्रांसलेटर में भी हुईं गलतियां
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में ‘शब्द’ नाम के एआई-आधारित अनुवाद डिवाइस की बात कही। उनके वक्तव्य को इसी डिवाइस से हिंदी से अंग्रेजी और तमिल में रियल टाइम अनुवाद कर पीछे बड़ी स्क्रीन पर डिस्प्ले किया गया। हालांकि अनुवादित वाक्यों में कई त्रुटियां भी थीं। हालांकि, प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भारत के राज्यों के बीच समानताएं विविधता को कम नहीं करतीं। बल्कि वे भारतीय पहचान को और मजबूत बनाती हैं।
रामेश्वरम है दक्षिण का काशी
प्रबंधन अध्ययन संस्थान के प्रो. पीवी राजीव ने दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाले प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को बताया। कहा कि रामेश्वरम को अक्सर “दक्षिण का काशी” कहा जाता है। इस दौरान नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित तमिल में बच्चों की पुस्तकों के अनुवाद का कुलपति ने लोकार्पण किया।
बीएचयू में जानकारियां लेते तमिल युवा।
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चोल युग की कांस्य प्रतिमाएं देख हुए मुग्ध
भारत कला भवन और दृश्य कला संकाय की आर्ट गैलरी पहुंचे तमिल छात्रों ने चंबू (गंगा–जमुनी कलश), चोल युग की कांस्य प्रतिमाएं, दक्षिण भारतीय पाषाण मूर्तिकला, कांचीपुरम ब्रोकेड वस्त्र और मैसूर शैली में निर्मित दुर्गा सप्तशती के लघुचित्र आदि देख उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संवाद और मेलमिलाप को महसूस किया।
इस दौरान अमीश त्रिपाठी भी साथ रहे। इसके बाद भारतीय भाषा विभाग में पैनल चर्चा की गई। इस दौरान डॉ. जगदीशन ने 1945 में स्थापित तमिल खंड की समृद्ध विरासत का परिचय देते हुए तमिल भाषा अध्ययन, शैव सिद्धांत और तमिल दर्शन में इसके योगदानों को बताया।
प्रो. गंगाधरण ने बताया कि तमिल भाषा को काशी में विशेष स्थान प्राप्त है। भरतियार के विचारों ने जाति और भाषा के विभाजनों को पार कर भारत की एकता को आकार दिया। सुब्रह्मणयम भारती की पोती डॉ. जयंती मुरली ने भरतियार के 16 वर्ष की आयु में काशी आगमन, उनके प्रसिद्ध गीत “वेल्लै तमरै पूविन्निले” की रचना, कई भाषाओं में उनकी दक्षता के बारे में बताया।
आईआईटी–बीएचयू के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. मनोज कुमार मेशराम ने जोस्टेल, क्रिकबज़, शॉपक्लूज और क्लीन इलेक्ट्रिक सहित आईआईटी–बीएचयू के पूर्व विद्यार्थियों द्वारा संचालित स्टार्टअप्स के बारे में बताया। सत्र का समापन आर्यो ग्रीन टेक लैब में भ्रमण के साथ हुआ।
अटल इन्क्यूबेशन सेंटर में जानी डेटा प्राइवेसी
सीडीसी के अटल इन्क्यूबेशन सेंटर में स्टार्टअप इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर-सुरक्षा और कृषि में नई तकनीक को जाना। श्वेता सिंह ने विकसित लिक्विड बायोप्सी पर आधारित उन्नत तकनीकों पर प्रस्तुति दी। मृत्युंजय सिंह ने डिजिटल युग में डेटा प्राइवेसी, अकाउंट हैकिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मिथिलेश सिंह ने एग्रो-टूरिज्म और कृषि में नवीनतम प्रथाओं पर बात की।
तमिल छात्रों ने मां गंगा का किया पूजन, दक्षिण भारतीय मंदिरों का जाना इतिहास
संगमम के दूसरे दिन बुधवार को तमिलनाडु से आए छात्रों का समूह हनुमान घाट पहुंचा। यहां सभी ने गंगा में स्नान कर मां का पूजा पाठ करते हुए सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। गंगा स्नान के बाद सभी मेहमानों ने घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों में दर्शन-पूजन किया।
पं वेंकट रमण घनपाठी ने बताया कि सभी मेहमानों को मंदिरों के इतिहास दिव्यता, भव्यता और इतिहास के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद तमिल मेहमानों ने हनुमान घाट स्थित सुब्रह्मण्य भारती के घर उनके परिवार के सदस्यों से उन्होंने मुलाकात की। साथ ही सुब्रह्मण्य भारती के घर के समीप पुस्तकालय का भी भ्रमण किया। छात्रों ने कांची मठ में वहां के इतिहास के बारे में भी जाना।
डेलीगेट्स ने देखी गंगा-कावेरी समप्रवाह प्रदर्शनी
डेलीगेट्स ने भारत कला भवन में गंगा-कावेरी समप्रवाह शीर्षक विशेष प्रदर्शनी देखी। प्रदर्शनी में संग्रहालय के संग्रह से चयनित चम्बू (गंगा-जमुनी कलश), चोल युग की कांस्य प्रतिमाएं, दक्षिण भारतीय पाषाण मूर्तिकला, कांचीपुरम ब्रोकेड वस्त्र और मैसूर शैली में निर्मित दुर्गा सप्तशती के लघुचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसे देखकर डेलीगेट्स गदगद हो गए।